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लीलाधर मंडलोई - तताँरा-वामीरो कथा

लेखक: लीलाधर मंडलोई

यह पाठ अंडमान- निकोबार द्वीप समूह की एक प्रसिद्ध लोककथा पर आधारित है, जो प्रेम, त्याग और रूढ़िवादी परंपराओं के बदलने की कहानी है।

1. तताँरा का व्यक्तित्व और उसकी तलवार

  • अंडमान द्वीप समूह के पासा गाँव में तताँरा नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत ही नेक, मददगार और शक्तिशाली था।
  • वह न केवल अपने गाँव बल्कि समूचे द्वीपवासियों की सेवा करना अपना कर्तव्य समझता था, इसलिए लोग उसका बहुत आदर करते थे।
  • तताँरा अपनी कमर में हमेशा एक लकड़ी की तलवार बाँधे रहता था। लोगों का विश्वास था कि उस तलवार में अद्भुत दैवीय शक्ति थी, हालाँकि उसने कभी उसका प्रयोग दूसरों के सामने नहीं किया था।

2. वामीरो से पहली मुलाकात

  • एक शाम, दिनभर की मेहनत के बाद तताँरा समुद्र किनारे टहल रहा था। तभी उसे एक मधुर गीत सुनाई दिया।
  • गीत की आवाज़ उसे एक युवती तक ले गई, जो डूबते सूरज को देखते हुए खोई हुई थी। वह युवती लपाती गाँव की वामीरो थी।
  • अचानक समुद्र की लहर से भीगने पर वामीरो ने गाना बंद कर दिया। तताँरा ने उससे गाना पूरा करने का विनम्र आग्रह किया।
  • पहले तो वामीरो ने बेरुखी दिखाई क्योंकि वह किसी अनजान युवक से बात नहीं करना चाहती थी, लेकिन तताँरा की विनम्रता और सम्मोहन में वह अपना नाम बता बैठी। तताँरा ने उसे अगले दिन उसी चट्टान पर आने का निवेदन किया।

3. मूक प्रेम और सामाजिक बाधा

  • दोनों हर शाम उसी चट्टान पर मिलने लगे। वे एक-दूसरे को बिना कुछ बोले बस एकटक निहारते रहते थे।
  • उनका प्रेम गहरा होता गया, लेकिन एक बड़ी सामाजिक समस्या थी। गाँव की परंपरा के अनुसार, विवाह केवल अपने ही गाँव में हो सकता था।
  • तताँरा 'पासा' गाँव का था और वामीरो 'लपाती' गाँव की। इसलिए उनका मिलन रीति-रिवाजों के विरुद्ध था। गाँव वालों ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे अडिग रहे।

4. पशु-पर्व की घटना और अपमान

  • कुछ समय बाद 'पासा' गाँव में 'पशु-पर्व' का आयोजन हुआ, जिसमें शक्ति प्रदर्शन और नृत्य-संगीत होता था।
  • वामीरो भी वहाँ आई और तताँरा को देखते ही रोने लगी। उसका रोना सुनकर उसकी माँ वहाँ आ गई।
  • गाँव वालों के सामने अपनी बेटी को रोता देख वामीरो की माँ क्रोधित हो गई और उसने तताँरा को बहुत अपमानित किया। गाँव के अन्य लोग भी तताँरा के विरोध में बोलने लगे।

5. तताँरा का क्रोध और द्वीप का विभाजन

  • अपमान और अपनी असहायता पर तताँरा को भीषण क्रोध आ गया। उसे विवाह की निषेध परंपरा पर बहुत क्षोभ था।
  • अपने गुस्से को शांत करने के लिए उसने अपनी लकड़ी की तलवार निकाली और पूरी शक्ति से धरती में घोंप दी।
  • वह तलवार को खींचते हुए दूर तक ले गया। इससे धरती में दरार पड़ गई और द्वीप दो टुकड़ों में बँटने लगा।
  • द्वीप के दो हिस्से हो गए—एक तरफ तताँरा था और दूसरी तरफ वामीरो। तताँरा जिस हिस्से पर था, वह समुद्र में धँसने लगा।

6. दुखद अंत और सुखद परिवर्तन

  • तताँरा बहते हुए कहीं गायब हो गया और उसका कुछ पता नहीं चला। उधर, वामीरो तताँरा के वियोग में पागल हो गई और उसने खाना-पीना छोड़ दिया।
  • इस घटना के बाद निकोबारी समाज में गहरा बदलाव आया। लोगों ने महसूस किया कि रूढ़ियाँ जब बोझ बन जाएँ तो उन्हें तोड़ देना चाहिए।
  • इस बलिदान के बाद निकोबार में दूसरे गाँवों में भी वैवाहिक संबंध बनाने की अनुमति मिल गई।
निष्कर्ष:
आज लिटिल अंडमान और कार-निकोबार जो अलग-अलग हैं (जो 96 किमी दूर हैं), वे तताँरा की तलवार से ही अलग हुए माने जाते हैं। तताँरा और वामीरो ने अपनी जान देकर प्रेम और बदलाव की एक अमर मिसाल कायम की।
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