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मीरा - पद
1. मीराबाई का जीवन परिचय
- जन्म और स्थान: मीराबाई का जन्म 1503 में जोधपुर के चोकड़ी (कुड़की) गाँव में हुआ माना जाता है।
- विवाह और संघर्ष: 13 वर्ष की अल्पायु में उनका विवाह मेवाड़ के महाराणा सांगा के पुत्र कुंवर भोजराज से हुआ। उनका जीवन दुखों से भरा रहा; बचपन में माँ का और विवाह के कुछ साल बाद पति, पिता और ससुर का देहांत हो गया।
- वैराग्य: भौतिक जीवन से निराश होकर मीरा ने घर-परिवार त्याग दिया और वृंदावन में जाकर पूरी तरह से गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण) के प्रति समर्पित हो गईं।
- भक्ति और गुरु: वे संत रैदास की शिष्या थीं। उनकी भक्ति 'दैन्य' और 'माधुर्य' भाव की है। वे कृष्ण को अपना आराध्य और पति मानती थीं।
- भाषा शैली: उनके पदों में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती भाषाओं का मिश्रण है। साथ ही पंजाबी, खड़ी बोली और पूर्वी के शब्द भी मिलते हैं।
2. पहले पद का सारांश: "हरि आप हरो जन री भीर"
इस पद में मीराबाई अपने आराध्य श्रीकृष्ण से अपनी पीड़ा (कष्ट) दूर करने की प्रार्थना करती हैं। वे ईश्वर द्वारा अपने भक्तों की रक्षा करने के पुराने उदाहरण देती हैं:
- द्रौपदी की रक्षा: जिस प्रकार आपने भरी सभा में वस्त्र बढ़ाकर द्रौपदी की लाज बचाई थी।
- प्रह्लाद की रक्षा: अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए आपने नरसिंह अवतार धारण किया था।
- ऐरावत की रक्षा: आपने मगरमच्छ को मारकर डूबते हुए हाथी (गजराज) के प्राण बचाए और उसे पीड़ा से मुक्त किया।
- मीरा की विनती: मीरा कहती हैं कि वे भी उनकी दासी हैं, इसलिए हे गिरधर! अब आप उनकी पीड़ा को भी दूर करें।
3. दूसरे पद का सारांश: "स्याम म्हाने चाकर राखो जी"
इस पद में मीरा श्रीकृष्ण के पास रहने के लिए उनकी सेविका (नौकरानी) बनने को भी तैयार हैं। वे कहती हैं:
- चाकरी की इच्छा: मीरा श्रीकृष्ण (श्याम) से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें अपनी दासी बना लें। दासी बनकर वे उनके लिए बाग-बगीचे लगाएंगी ताकि रोज सुबह उठकर उनके दर्शन कर सकें।
- तीन फायदे: सेवा करने से उन्हें तीन चीजें मिलेंगी—
- दर्शन (वे इसे वेतन मानती हैं)।
- स्मरण (इसे वे खर्च या जेबखर्च मानती हैं)।
- भाव-भक्ति (इसे वे जागीर या संपत्ति मानती हैं)।
- श्रीकृष्ण का रूप-सौंदर्य: मीरा लिखती हैं कि उनके प्रभु के सिर पर मोर मुकुट है, शरीर पर पीला वस्त्र (पीतांबर) सुशोभित है और गले में वैजयंती फूलों की माला है। वे वृंदावन में गायें चराते हैं और मनमोहक मुरली बजाते हैं।
- भक्ति की योजना: मीरा ऊँचे-ऊँचे महल बनाएंगी और उनके बीच में खिड़कियाँ रखेंगी ताकि सांवरा सेठ (कृष्ण) के दर्शन हो सकें। वे कुसुम्बी (लाल) रंग की साड़ी पहनकर उनके दर्शन करेंगी।
- व्याकुलता: मीरा का हृदय अपने प्रभु से मिलने के लिए बहुत बेचैन है। वे श्रीकृष्ण से आधी रात को यमुना नदी के किनारे दर्शन देने की विनती करती हैं।
सारांश "मीरा मुक्तावली" और पाठ्यपुस्तक के अध्यायों पर आधारित।
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