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नभ के पिंड - do checkout all questions & answers of this chapter.
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'नभ के पिंड' अध्याय का मुख्य सारांश निम्नलिखित बिंदुओं में दिया गया है:

  • आकाश का स्वरूप: अध्याय के अनुसार, आकाश (नभ) दूरी के कारण नीला दिखाई देता है और इसमें सूर्य, चंद्रमा तथा तारे मिलकर रहते हैं।
  • दिन और रात के स्वामी: सूर्य को दिन का मालिक कहा गया है, जबकि चाँद और तारे रात के समय दुनिया को अपनी रोशनी से भर देते हैं।
  • सौरमंडल का केंद्र: सूर्य हमारे सौरमंडल के मध्य (केंद्र) में स्थित है और यह इसका सबसे बड़ा सदस्य है।
  • सूर्य का विशाल आकार: सूर्य पृथ्वी से लगभग तेरह लाख गुना बड़ा है।
  • प्रकाश की गति: सूर्य की किरणों को धरती तक पहुँचने में साढ़े आठ मिनट का समय लगता है, जबकि अन्य तारों की रोशनी आने में कई वर्ष लग जाते हैं।
  • ग्रह और तारों में अंतर: ग्रह तारों से भिन्न होते हैं क्योंकि ग्रहों के पास अपना स्वयं का प्रकाश नहीं होता (वे प्रकाशहीन होते हैं)।
  • ग्रहों की चमक: सभी ग्रह अपनी चमक के लिए सूर्य की रोशनी पर निर्भर करते हैं और उसी से प्रकाशित होते हैं।
  • सौरमंडल की परिभाषा: सूर्य और उसकी परिक्रमा करने वाले ग्रहों तथा उपग्रहों के समूह को सौरमंडल कहा जाता है।
  • पृथ्वी की स्थिति: हमारी पृथ्वी भी एक ग्रह है जिसके पड़ोस में कई अन्य ग्रह स्थित हैं और ये सभी सूर्य की मदद से प्रकाशित होते हैं।

सौरमंडल को एक बड़े परिवार की तरह समझा जा सकता है, जहाँ सूर्य परिवार के मुखिया की तरह केंद्र में रहकर सबको रोशनी और ऊर्जा देता है, और बाकी सभी सदस्य (ग्रह) उसी के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं।

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