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अध्याय "यादों के झरोखे से" ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के बचपन और उनके प्रारंभिक जीवन के संघर्षों तथा प्रेरणाओं का संस्मरण है। इस अध्याय का बिंदुवार सारांश निम्नलिखित है:

  • जन्म और परिवार: कलाम का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम कस्बे में एक तमिल परिवार में हुआ था। उनके पिता अधिक पढ़े-लिखे या धनवान नहीं थे, लेकिन वे अत्यंत बुद्धिमान, उदार और खुले विचारों वाले व्यक्ति थे। उनकी माँ, आशिअम्मा, एक दयालु महिला थीं जो परिवार के साथ-साथ बाहरी लोगों को भी भोजन कराती थीं।
  • सादगीपूर्ण बचपन: कलाम का बचपन बहुत ही सादगी और बेफ़िक्री में बीता। वे अपने पुश्तैनी पक्के घर में रहते थे और अक्सर अपनी माँ के साथ रसोई में ज़मीन पर बैठकर केले के पत्ते पर चावल, सुगंधित साँभर, घर का अचार और ताज़ा नारियल की चटनी खाते थे।
  • धार्मिक सद्भाव: रामेश्वरम में हिंदू-मुस्लिम एकता का सुंदर वातावरण था। जहाँ एक ओर उनके पिता उन्हें नमाज़ के लिए मस्जिद ले जाते थे, वहीं उनकी माँ और दादी उन्हें रामायण के किस्से और पैगंबर मुहम्मद से जुड़ी घटनाएँ सुनाती थीं। रामेश्वरम मंदिर के मुख्य पुजारी लक्ष्मण शास्त्री उनके पिता के घनिष्ठ मित्र थे।
  • मित्रता: बचपन में उनके तीन पक्के दोस्त थे—रामानंद, अरविंदन् और शिवप्रकाशन। रामानंद मंदिर के पुजारी का बेटा था और कलाम के साथ स्कूल में पहली बेंच पर बैठता था। इन मित्रों के बीच कभी भी धार्मिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं था।
  • शिक्षकों का प्रभाव: उनके विज्ञान शिक्षक शिव सुब्रह्मण्य अय्यर उन्हें बहुत स्नेह करते थे और उन्हें ऊँचा शिक्षित व्यक्ति बनने के लिए प्रेरित करते थे। बाद में रामनाथपुरम में उनके गुरु अयादुरै सोलोमन ने उन्हें सिखाया कि आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति से किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है।
  • आकाश की ओर उड़ान: बचपन से ही कलाम को समुद्र के ऊपर उड़ते पक्षी और आकाश अपनी ओर आकर्षित करते थे। गुरु सोलोमन की प्रेरणा और पक्षियों को देखकर ही उन्होंने निश्चय किया कि वे भी एक दिन आकाश में ऊँची उड़ान भरेंगे।
  • लक्ष्य के प्रति समर्पण: उच्च शिक्षा के लिए कलाम ने अपने पिता से अनुमति लेकर रामनाथपुरम जाने का फैसला किया। घर और माँ की बनाई मिठाई 'पोली' की बहुत याद आने के बावजूद, उन्होंने अपने पिता के सपने को साकार करने के लिए कठोर परिश्रम किया और सफलता की राह पर आगे बढ़ते रहे।

निष्कर्ष के तौर पर, कलाम का जीवन हमें सिखाता है कि बड़े लक्ष्य निर्धारित करना और उन्हें पाने के लिए कड़ी मेहनत करना ही सफलता की कुंजी है।

एक छोटे से बीज के समान जो मिट्टी की गहराइयों से निकलकर सूरज की रोशनी की ओर बढ़ता है, कलाम ने भी अपनी साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अपने सपनों की ऊँचाई को छुआ।

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