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अध्याय 14, "घातक रोग : एड्स" का सारांश निम्नलिखित बिंदुओं में दिया गया है:
- भ्रांतियों का निवारण: यह अध्याय एड्स के बारे में समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करने का प्रयास करता है। कहानी की शुरुआत में विक्टर रामू काका की दुकान पर जाने से डरता है क्योंकि उसे लगता है कि उनके पास जाने से उसे भी एड्स हो जाएगा।
- एड्स और एच.आई.वी. की परिभाषा: डॉक्टर (विक्टर के पिता) समझाते हैं कि एड्स का पूरा नाम 'एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम' है। यह एच.आई.वी. (ह्यूमन इम्यूनो डेफिशिएंसी वायरस) नामक एक घातक विषाणु से होता है।
- शरीर पर प्रभाव: एच.आई.वी. वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद धीरे-धीरे शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता (रोग-रोधी क्षमता) को समाप्त कर देता है, जिससे रोगी अन्य बीमारियों से ठीक नहीं हो पाता।
- बीमारी के फैलने के कारण: यह रोग मुख्य रूप से चार कारणों से फैलता है:
- दूषित सुइयों (इंजेक्शन) के प्रयोग से।
- अस्वच्छ औजारों से नाक-कान छेदने या टैटू गुदवाने से।
- एच.आई.वी. ग्रस्त व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाने से।
- संक्रमित माँ द्वारा बच्चे को दूध पिलाने से।
- क्या सुरक्षित है: डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि एड्स छूने का रोग नहीं है। यह रोगी से हाथ मिलाने या साथ खाने-पीने से नहीं फैलता।
- इलाज और सावधानी: वर्तमान में इस बीमारी का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन शोध जारी है। रोगियों को अपनी सेहत बनाए रखने के लिए प्रोटीन और विटामिन युक्त भोजन जैसे अंडे, दालें, हरी सब्जियाँ और मांस-मछली खाने की सलाह दी जाती है।
- सांख्यिकी: भारत में लगभग 30 लाख लोग एच.आई.वी. के रोगी हैं।
- अन्य वायरस जनित रोग: अध्याय के अंत में डेंगू, पोलियो, चेचक, रेबीज और कोविड-19 जैसी अन्य विषाणुजनित बीमारियों के बारे में भी संक्षिप्त जानकारी दी गई है।
उपमा: एड्स शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर उसी तरह हमला करता है जैसे किसी किले की सुरक्षा दीवार का ढह जाना; जब दीवार (इम्युनिटी) गिर जाती है, तो कोई भी छोटा दुश्मन (बीमारी) आसानी से अंदर घुसकर नुकसान पहुँचा सकता है।
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