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भारत माता - मैथिलीशरण गुप्त

भारत माता का मंदिर यह, समता का संवाद जहाँ,

सबका शिव-कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।

जाति-धर्म या संप्रदाय का, नहीं भेद-व्यवधान यहाँ,

सबका स्वागत, सबका आदर, सबका सम सम्मान यहाँ।

राम, रहीम, बुद्ध, ईसा का, सुलभ एक-सा ध्यान यहाँ,

भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों के गुण-गौरव का ज्ञान यहाँ।

नहीं चाहिए बुद्धि बैर की, भला प्रेम-उन्माद यहाँ,

सबका शिव-कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।

सब तीर्थों का एक तीर्थ यह हृदय पवित्र बना लें हम,

आओ, यहाँ अजातशत्रु बन, सबको मित्र बना लें हम।

रेखाएँ प्रस्तुत हैं, अपने मन के चित्र बना लें हम,

सौ-सौ आदर्शों को लेकर, एक चरित्र बना लें हम।

कोटि-कोटि कंठों से मिलकर, उठे एक जयनाद यहाँ,

सबका शिव-कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।

एक साथ मिल बैठ बाँट लो, अपना हर्ष-विषाद यहाँ,

सबका शिव-कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।

___________________________________


मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता 'भारत माता' और इस अध्याय का सारांश निम्नलिखित बिंदुओं में दिया गया है:

  • समानता का मंदिर: भारत को एक ऐसे मंदिर के रूप में वर्णित किया गया है जहाँ 'समता' (समानता) का संवाद होता है और यहाँ सभी के कल्याण की बात की जाती है,।
  • सांप्रदायिक सद्भाव: यहाँ जाति, धर्म या संप्रदाय के आधार पर कोई भेदभाव या बाधा (व्यवधान) नहीं है,। भारत में राम, रहीम, बुद्ध और ईसा, सभी का समान रूप से ध्यान किया जाता है।
  • सबका स्वागत और सम्मान: इस देश में सभी का स्वागत, आदर और समान सम्मान किया जाता है। यहाँ भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के गौरव का ज्ञान मिलता है।
  • प्रेम और मित्रता का संदेश: कवि का मानना है कि हमें बैर (दुश्मनी) वाली बुद्धि नहीं रखनी चाहिए, बल्कि प्रेम-उन्माद को अपनाना चाहिए। हमें 'अजातशत्रु' (जिसका कोई शत्रु न हो) बनकर सबको मित्र बनाना चाहिए,।
  • चरित्र निर्माण: अध्याय में सौ-सौ आदर्शों को लेकर एक श्रेष्ठ चरित्र बनाने की प्रेरणा दी गई है,।
  • साझा हर्ष और विषाद: भारतीयों को अपने हर्ष-विषाद (सुख-दुख) एक साथ मिल-बैठकर बाँटने का संदेश दिया गया है,।
  • विविधता में एकता: भारत एक ऐसा पावन तीर्थ है जहाँ सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और यहाँ अतिथि को देवता के समान माना जाता है,।
  • देशभक्ति और भाईचारा: 'सारे जहाँ से अच्छा' कविता के माध्यम से यह बताया गया है कि मज़हब आपस में बैर रखना नहीं सिखाता और हम सभी भारतीय एक हैं।

भारत माता का यह अध्याय हमें सिखाता है कि जिस प्रकार एक माला अलग-अलग फूलों से मिलकर सुंदर बनती है, उसी प्रकार भारत विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के मेल से एक पवित्र और शक्तिशाली राष्ट्र बनता है।

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