Q&A & Flashcards Available

Access questions, answers and flashcards for this chapter

View Q&A
Infographic
Quick Navigation:
| | |

उपभोक्तावाद की संस्कृति

पाठ का परिचय

यह निबंध प्रसिद्ध समाज वैज्ञानिक श्यामाचरण दुबे द्वारा लिखा गया है। इसमें लेखक ने बाजार की गिरफ्त में आते जा रहे समाज की वास्तविकता को प्रस्तुत किया है। लेखक का मानना है कि आज हम विज्ञापनों की चमक-दमक के कारण वस्तुओं की गुणवत्ता पर ध्यान दिए बिना उनके पीछे भाग रहे हैं, जिससे एक नई 'उपभोक्तावादी संस्कृति' का जन्म हो रहा है।

1. जीवन शैली और 'सुख' की नई परिभाषा

  • आज समाज में एक नई जीवन-शैली अपना वर्चस्व स्थापित कर रही है।
  • चारों ओर उत्पादन बढ़ाने पर जोर है, लेकिन यह उत्पादन 'उपभोक्ताओं' के भोग और सुख के लिए बताया जा रहा है।
  • आज 'सुख' की परिभाषा बदल गई है; अब केवल वस्तुओं का उपभोग (Consumption) करना ही सुख माना जाने लगा है।
  • जाने-अनजाने में आज के माहौल में व्यक्ति का चरित्र बदल रहा है और वह उत्पादों को ही अपना जीवन समर्पित करता जा रहा है।

2. विज्ञापनों का मायाजाल और विलासिता

  • बाजार विलासिता की सामग्रियों से भरा पड़ा है जो लोगों को लुभाने की निरंतर कोशिश करता है।
  • टूथपेस्ट और ब्रश: विज्ञापनों में किसी पेस्ट को 'जादुई फार्मूला' तो किसी को ऋषि-मुनियों द्वारा स्वीकृत बताया जाता है। यदि पेस्ट अच्छा है, तो ब्रश भी महंगा और आकर्षक होना चाहिए।
  • सौंदर्य प्रसाधन: संभ्रांत महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल पर तीस-तीस हजार की सौंदर्य सामग्री होना आम बात हो गई है। पेरिस से परफ्यूम मंगाना प्रतिष्ठा का चिह्न बन गया है।
  • पुरुष भी अब केवल साबुन और तेल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आफ़्टर शेव और कोलोन जैसी दर्जनों चीजें उनकी सूची में जुड़ गई हैं।

3. प्रतिष्ठा और दिखावे की होड़

  • परिधान और फैशन: जगह-जगह बुटीक खुल गए हैं और नए डिजाइनों के महंगे कपड़े बाजार में आ गए हैं। पिछले साल का फैशन इस साल अपनाना शर्म की बात मानी जाती है।
  • घड़ी: घड़ी अब केवल समय देखने के लिए नहीं, बल्कि हैसियत (Status) दिखाने के लिए खरीदी जाती है, जिसकी कीमत लाखों में हो सकती है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: म्यूजिक सिस्टम और कंप्यूटर काम के लिए कम और दिखावे के लिए ज्यादा खरीदे जा रहे हैं।
  • पाँच सितारा संस्कृति: भोजन के लिए पाँच सितारा होटल, इलाज के लिए पाँच सितारा अस्पताल और पढ़ाई के लिए पाँच सितारा पब्लिक स्कूलों का चलन बढ़ गया है।
  • अंतिम संस्कार: अमेरिका और यूरोप में लोग मरने से पहले ही अपने अंतिम संस्कार और विश्राम का प्रबंध कर सकते हैं, जहाँ कब्र के पास हरी घास और मनचाहे फूल होंगे। यह प्रवृत्ति भारत में भी आ सकती है।

4. सांस्कृतिक अस्मिता का संकट और परिणाम

  • बौद्धिक दासता: हम पश्चिम के सांस्कृतिक उपनिवेश बन रहे हैं और अपनी परंपराओं का अवमूल्यन कर रहे हैं।
  • छद्म आधुनिकता: हम आधुनिकता के झूठे प्रतिमान अपना रहे हैं और अपनी सांस्कृतिक पहचान खोते जा रहे हैं।
  • संसाधनों का अपव्यय: पिज़्ज़ा और बर्गर जैसे 'कूड़ा खाद्य' (Junk Food) का सेवन बढ़ रहा है और सीमित संसाधनों की बर्बादी हो रही है।
  • सामाजिक अशांति: जीवन स्तर का यह बढ़ता अंतर समाज में आक्रोश और अशांति पैदा कर रहा है। मर्यादाएं टूट रही हैं और स्वार्थ परमार्थ पर हावी हो रहा है।

निष्कर्ष और गाँधीजी का संदेश

लेखक चिंता व्यक्त करते हैं कि यदि दिखावे की यह संस्कृति फैलती रही, तो सामाजिक विषमता और अशांति बढ़ेगी। अंत में, गाँधीजी के विचारों का उल्लेख किया गया है:

"हमें स्वस्थ सांस्कृतिक प्रभावों के लिए अपने दरवाजे-खिड़कियाँ खुले रखने चाहिए, पर अपनी बुनियाद पर कायम रहना चाहिए।"

उपभोक्तावादी संस्कृति हमारी सामाजिक नींव को ही हिला रही है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा और चुनौती है।

How does consumerism impact the core foundations of Indian society? Explain Shyama Charan Dube's concerns about advertising's visual appeal. What are the long-term social consequences of this 'show-off' culture?
Quick Navigation:
| | |
1 / 1
Quick Navigation:
| | |
Quick Navigation:
| | |