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नागार्जुन: यह दंतुरित मुसकान और फसल

1. कवि परिचय: नागार्जुन

  • जीवन परिचय: नागार्जुन का जन्म 1911 में बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में हुआ था। इनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था।
  • शिक्षा और प्रवास: इनकी आरंभिक शिक्षा संस्कृत पाठशाला में हुई। 1936 में वे श्रीलंका गए और बौद्ध धर्म अपनाया। वे स्वभाव से घुमक्कड़ और फक्कड़ थे।
  • साहित्यिक नाम: हिंदी में 'नागार्जुन' और मैथिली भाषा में 'यात्री' नाम से रचनाएँ कीं। उन्हें 'आधुनिक कबीर' भी कहा जाता है।
  • कृतियाँ: युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, हजार-हजार बाँहों वाली, तुमने कहा था, आदि।
  • मृत्यु: इनका देहांत 1998 में हुआ।
  • विशेषता: वे जनवादी कवि थे और उनकी कविताएँ लोकजीवन, प्रकृति और समकालीन राजनीति के यथार्थ चित्रण के लिए जानी जाती हैं।

2. कविता का सारांश: 'यह दंतुरित मुसकान'

इस कविता में कवि ने एक छोटे बच्चे की नई-नई निकली दाँतों वाली मुसकान की सुंदरता का वर्णन किया है।

  • मृतक में भी जान डालना: कवि का मानना है कि बच्चे की निश्छल और दंतुरित मुसकान इतनी मोहक है कि यह किसी मुर्दे (हताश व्यक्ति) में भी प्राण डाल सकती है।
  • धूल से सने अंग: बच्चे का धूल-धूसरित शरीर देखकर ऐसा लगता है जैसे तालाब को छोड़कर कमल का फूल कवि की झोपड़ी में खिल गया हो।
  • पत्थर का पिघलना: बच्चे का स्पर्श इतना कोमल और जादुई है कि उसे छूकर कठोर पत्थर भी पिघलकर जल (पानी) बन गया होगा।
  • अपरिचित कवि: चूँकि कवि एक घुमक्कड़ है और बहुत दिनों बाद लौटा है, बच्चा उसे पहचान नहीं पाता और अपलक देखता रहता है।
  • माँ का माध्यम: कवि बच्चे के लिए एक अतिथि जैसा है। यदि बच्चे की माँ माध्यम न बनी होती, तो कवि इस सुंदरता को देख नहीं पाता। माँ ही बच्चे को मधुपरक (शहद, घी, दही आदि का मिश्रण) चटाती है।
  • नज़रों का मिलन: जब बच्चा कवि को तिरछी नज़रों (कनखी) से देखता है और दोनों की आँखें मिलती हैं, तब उसकी मुसकान और भी सुंदर और छविमान लगती है।

3. कविता का सारांश: 'फसल'

इस कविता में कवि ने स्पष्ट किया है कि फसल केवल प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि मानव श्रम और प्रकृति के सहयोग का परिणाम है।

  • नदियों का पानी: फसल एक या दो नहीं, बल्कि ढेर सारी नदियों के पानी का जादू है।
  • मनुष्य का परिश्रम: फसल लाखों-करोड़ों मनुष्यों के हाथों के स्पर्श की गरिमा और परिश्रम का फल है।
  • मिट्टी का गुण-धर्म: इसमें हज़ारों खेतों की अलग-अलग प्रकार की (भूरी, काली, संदली) मिट्टी के गुण समाए हुए हैं।
  • सूर्य और हवा का योगदान: फसल सूरज की किरणों का बदला हुआ रूप (रूपांतर) है और हवा की थिरकन का सिमटा हुआ संकोच है।
  • निष्कर्ष: कवि के अनुसार, फसल प्रकृति और मनुष्य के साझे प्रयासों का ही सृजन है। यह उपभोक्ता संस्कृति के दौर में हमें कृषि संस्कृति के महत्व की याद दिलाती है।

4. महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्द अर्थ
दंतुरित बच्चे के नए-नए निकले दाँत
जलजात कमल का फूल
अनिमेष बिना पलक झपकाए लगातार देखना
मधुपरक पंचामृत (दही, घी, शहद, जल, दूध का योग)
कनखी तिरछी निगाह से देखना
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