Q&A & Flashcards Available

Access questions, answers and flashcards for this chapter

View Q&A
आदमी का अनुपात - do checkout all questions & answers of this chapter.
Infographic
Quick Navigation:
| |

आदमी का अनुपात

पाठ का मूल भाव: यह अध्याय प्रसिद्ध कवि गिरिजा कुमार माथुर द्वारा रचित एक अत्यंत अर्थपूर्ण कविता पर आधारित है। इस कविता में ब्रह्मांड की असीम विशालता के सामने मनुष्य की अत्यंत नगण्य (छोटी) स्थिति को दर्शाया गया है। साथ ही, मनुष्य के अहंकार, स्वार्थ और उसके द्वारा बनाई गई अलगाव की दीवारों पर करारा व्यंग्य किया गया है।

अध्याय का विस्तृत बिंदुवार सारांश:

  • 1. ब्रह्मांड की विशालता का क्रमिक वर्णन

    कवि ने आकार और विस्तार को समझाते हुए एक क्रम बताया है— कमरे से बड़ा घर, घर से बड़ा मुहल्ला, मुहल्ले से बड़ा नगर, नगर से बड़ा प्रदेश और प्रदेश से बड़ा देश होता है। कई देशों को मिलाकर यह पृथ्वी बनी है। अनगिनत नक्षत्रों, आकाशगंगाओं (नभ गंगा) और लाखों ब्रह्मांडों के बीच हमारी पृथ्वी केवल एक धूल के कण के समान है।

  • 2. मनुष्य की लघुता (छोटापन)

    इस अनंत और विशाल ब्रह्मांड में मनुष्य का अस्तित्व बहुत ही सूक्ष्म है। ब्रह्मांड के अनुपात (Ratio) में आदमी की कोई बिसात नहीं है। करोड़ों ग्रहों और नक्षत्रों के बीच मनुष्य केवल एक अत्यंत क्षुद्र इकाई है।

  • 3. मनुष्य का अहंकार और नकारात्मक प्रवृत्तियां

    अपनी इतनी नगण्य स्थिति होने के बावजूद भी, मनुष्य के भीतर ईर्ष्या, अहंकार (अहं), स्वार्थ, घृणा और अविश्वास जैसी भावनाएं कूट-कूट कर भरी हुई हैं। वह अपनी तुच्छ सीमाओं को भूलकर घमंड में जीता है।

  • 4. कृत्रिम दीवारें और प्रभुत्व की होड़

    मनुष्य ने अपनी संकीर्ण मानसिकता और स्वार्थ के कारण शंखों (अनगिनत) के समान बड़ी अलगाव की दीवारें खड़ी कर ली हैं। वह हमेशा दूसरों को अपने अधीन करने और खुद को दूसरों का 'स्वामी' (मालिक) बनाने की व्यर्थ कोशिश करता रहता है।

  • 5. एक ही कमरे में दो दुनिया

    कवि गहरा व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि देशों या सीमाओं के विभाजन की तो बात ही छोड़िए, मनुष्य इतना आत्मकेंद्रित और अविश्वासी हो गया है कि वह एक छोटे से कमरे में रहते हुए भी मानसिक रूप से दो अलग-अलग दुनिया बना लेता है। अर्थात लोगों के दिलों में एक-दूसरे के लिए दूरियां पैदा हो गई हैं।

  • 6. कवि परिचय

    गिरिजा कुमार माथुर (1919-1994) का जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर में हुआ था। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'मंजीर', 'नाश और निर्माण', 'धूप के धान', 'शिलापंख चमकीले' और 'मैं वक्त के हूँ सामने' शामिल हैं। इस पाठ के अंत में दिया गया प्रसिद्ध और प्रेरणादायक गीत 'होंगे कामयाब' भी उन्हीं के द्वारा अनुवादित (भावांतर) किया गया है।

  • 7. भाषा, व्याकरण एवं अन्य ज्ञान

    पाठ के अभ्यास में विशेषण और विशेष्य (जैसे- 'छोटी' विशेषण है और 'पृथ्वी' विशेष्य) की पहचान सिखाई गई है। इसके अतिरिक्त, छात्रों के सामान्य ज्ञान को बढ़ाने के लिए भारतीय संख्या प्रणाली की पूरी तालिका (इकाई, दहाई, सैकड़ा से लेकर अरब, खरब, नील, पद्म, शंख और महाशंख तक) विस्तार से दी गई है।

निष्कर्ष

यह अध्याय मानव जाति को उसकी वास्तविक स्थिति का दर्पण दिखाता है। यह हमें संदेश देता है कि हमें अपने अहंकार, ईर्ष्या और स्वार्थ की दीवारों को तोड़कर प्रेम, सहिष्णुता, सहयोग और विश्व-बंधुत्व की भावना के साथ अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए।

Do checkout all questions & answers of this chapter.

Quick Navigation:
| |
1 / 1
Quick Navigation:
| |