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तरुण के स्वप्न

  • गृहउद्योगों का भविष्य नेताजी ने अपने पत्र के माध्यम से भारत में गृहउद्योगों (Cottage Industries) की दशा और उनके भविष्य पर गहरी चिंता और अपने विचार व्यक्त किए हैं। राष्ट्र की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए वे इन उद्योगों को अत्यधिक महत्वपूर्ण मानते थे।
  • सर्वांगीण स्वाधीन और संपन्न समाज का स्वप्न पाठ में युवाओं (तरुणों) के सपनों को दिशा दी गई है। नेताजी एक ऐसे सर्वांगीण समाज की स्थापना पर जोर देते हैं जो न केवल राजनीतिक रूप से स्वाधीन हो, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी पूरी तरह संपन्न और समृद्ध हो।
  • स्त्री सशक्तिकरण (Women Empowerment) स्वतंत्रता और राष्ट्र-निर्माण में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए स्त्री सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया गया है। समाज की सच्ची उन्नति के लिए महिलाओं का जागरूक और सशक्त होना आवश्यक है।
  • स्वतंत्रता सेनानी और उनके नारे पाठ में देशभक्ति की भावना जगाने के लिए नेताजी के अमर उद्घोष “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है। साथ ही, छात्रों को अन्य प्रिय स्वतंत्रता सेनानियों और उनके आदर्श नारों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया गया है।
  • युवाओं के दायित्व (तरुण के स्वप्न) अध्याय का शीर्षक इस बात को स्पष्ट करता है कि देश का भविष्य युवाओं के सपनों और उनके संकल्पों पर टिका है। यह पत्र युवाओं के भीतर राष्ट्र-प्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और समाज-सेवा के बीज बोने का एक सशक्त माध्यम है।
  • भाषा, व्याकरण और शब्दकोश अध्याय के अंत में छात्रों के भाषाई विकास के लिए विस्तृत अभ्यास दिए गए हैं:
    • विपरीतार्थक (विलोम) शब्द और उनका वाक्यों में प्रयोग।
    • स्तंभ मिलान (कॉलम मैचिंग) के माध्यम से समझ का मूल्यांकन।
    • विस्तृत शब्दकोश (Dictionary) जिसमें कठिन शब्दों (जैसे- अखंड, अकर्मण्य, अतिथि, उद्घोष, आदि) के अर्थ, उनके स्रोत (संस्कृत, अरबी, फारसी) और व्याकरणिक रूप (संज्ञा, विशेषण, क्रिया) स्पष्ट किए गए हैं।
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