Q&A & Flashcards Available

Access questions, answers and flashcards for this chapter

View Q&A
Infographic
Quick Navigation:
| |

नए मेहमान

'नए मेहमान' श्री उदयशंकर भट्ट द्वारा रचित एक अत्यंत रोचक, व्यंग्यात्मक और हास्यपूर्ण एकांकी है। यह पाठ एक शहरी मध्यमवर्गीय परिवार की आवासीय समस्याओं, भीषण गर्मी की परेशानियों और अचानक 'बिन बुलाए अनजान मेहमानों' के आ जाने पर पैदा होने वाली असहज स्थिति का बहुत ही सजीव और यथार्थवादी चित्रण करता है। पाठ का विस्तृत बिंदु-वार सारांश निम्नलिखित है:

  • 1. भीषण गर्मी और छोटे मकान की घुटन

    एकांकी की शुरुआत भयंकर गर्मी की एक रात से होती है। गृहपति विश्वनाथ और उनकी पत्नी रेवती एक छोटे से किराए के मकान में रहते हैं जहाँ हवा का नामोनिशान नहीं है। गर्मी के कारण घर भट्टी की तरह तप रहा है, बच्चे पसीने से लथपथ हैं और रेवती के सिर में तेज दर्द हो रहा है।

  • 2. स्वार्थी और निर्दयी पड़ोसी

    जगह की कमी और भयंकर गर्मी के कारण विश्वनाथ अपने बच्चों को खुली छत पर सुलाना चाहते हैं। लेकिन उनका पड़ोसी बहुत ही स्वार्थी और निर्दयी है। छत खाली होने के बावजूद वह बच्चों की खाट वहां बिछाने की अनुमति नहीं देता, जिससे विश्वनाथ और रेवती की परेशानी और बढ़ जाती है।

  • 3. अनजान मेहमानों का अचानक आगमन

    इसी परेशानी के बीच रात के समय दो व्यक्ति (नन्हेमल और बाबूलाल) पसीने से भीगे हुए अपना सामान लेकर उनके घर आ धमकते हैं। वे दोनों बिना किसी संकोच के घर में ऐसे प्रवेश करते हैं जैसे वे विश्वनाथ के बहुत पुराने परिचित हों।

  • 4. संकोचवश आदर-सत्कार और रेवती की झुंझलाहट

    विश्वनाथ उन दोनों को बिल्कुल नहीं पहचानते, फिर भी भारतीय शिष्टाचार और संकोच के कारण वे उनसे कुछ पूछ नहीं पाते। मेहमान जमकर ठंडा पानी पीते हैं, नहाने की इच्छा जताते हैं और भोजन की मांग करते हैं। बीमार और थकी हुई रेवती इस असमय की मांग से अत्यधिक झुंझला जाती है और खाना बनाने से साफ इंकार कर देती है।

  • 5. मेहमानों की गलती और पड़ोसी का क्रोध

    नहाने और मुंह धोने के दौरान दोनों मेहमान गलती से उस निर्दयी पड़ोसी की छत पर गंदा पानी फैला देते हैं। इस पर पड़ोसी भड़क उठता है और आकर विश्वनाथ को खूब खरी-खोटी सुनाता है। विश्वनाथ को दूसरों की गलती के कारण बिना वजह अपमान सहना पड़ता है।

  • 6. गलतफहमी का खुलना

    अंततः परेशान होकर विश्वनाथ मेहमानों से स्पष्ट रूप से पूछते हैं कि उन्हें किसके घर जाना था। बातचीत से यह खुलासा होता है कि नन्हेमल और बाबूलाल दरसल किसी 'कविराज रामलाल' (जो एक वैद्य हैं) के यहाँ आए थे और गलत पता समझकर विश्वनाथ के घर में घुस आए थे। सच्चाई का पता चलते ही दोनों मेहमान वहां से चले जाते हैं और विश्वनाथ के परिवार की जान में जान आती है।

  • 7. रेवती के भाई का आना और आतिथ्य का असली रूप

    उन अनजान मेहमानों के जाने के तुरंत बाद, घर में रेवती का सगा भाई (आगंतुक) आ जाता है। वह भी काफी देर से घर ढूंढते हुए परेशान हो गया था। जो रेवती कुछ देर पहले अनजान मेहमानों के लिए थकान और सिरदर्द का बहाना देकर खाना बनाने से मना कर रही थी, वह अपने भाई को देखकर सब कुछ भूल जाती है। वह अत्यंत प्रसन्नता से उसका स्वागत करती है और तुरंत खुशी-खुशी भोजन बनाने रसोई में चली जाती है।

निष्कर्ष: यह एकांकी मानवीय मनोविज्ञान को बड़ी ही सहजता से दर्शाती है कि अनचाहे मेहमान बोझ लगते हैं, जबकि अपने प्रियजनों के आने पर सारी थकान और पीड़ा अपने आप दूर हो जाती है।

Quick Navigation:
| |
1 / 1
Quick Navigation:
| |