Quick Navigation:
| |
मत बाँधो
कवयित्री: महादेवी वर्मा
अध्याय का विस्तृत सारांश
- ✦ सपनों की स्वतंत्रता: कविता का मुख्य भाव सपनों को आज़ाद रखने का आग्रह है। कवयित्री कहती हैं कि सपनों के पंख कभी नहीं काटने चाहिए और न ही उनकी स्वाभाविक गति को बाँधना चाहिए।
- ✦ प्रकृति के उदाहरण: कविता में सुगंध (सौरभ), बीज, अग्नि और धुएँ का सुंदर उपयोग किया गया है। जिस प्रकार फूल की महक आकाश में उड़ जाती है, बीज मिट्टी में गिरकर नया जीवन पाता है, और अग्नि का धुआँ उन्मुक्त होकर आकाश में मँडराता है, उसी प्रकार सपनों का भी अपना स्वतंत्र स्वभाव होता है।
- ✦ आरोहण और अवरोहण: सपनों में दो तरह की गतियाँ होती हैं — ऊपर उठना (आरोहण) और नीचे आना (अवरोहण)। सपने आसमान की ऊँचाइयों तक उड़ान भरते हैं और फिर यथार्थ बनकर हमारी आँखों में लौट आते हैं। अतः इनकी गति पर कोई रोक या बंधन नहीं लगाना चाहिए।
- ✦ सपनों की रचनात्मक शक्ति: जब सपनों को आज़ाद छोड़ दिया जाता है, तो वे मुक्त आकाश में विचरण करते हैं। वे आसमान के तारों से मिलते हैं, बादलों (मेघों) से सुंदर रंग और सूर्य की किरणों से चमक (दीप्ति) लेकर वापस धरती पर आते हैं।
- ✦ धरती को स्वर्ग बनाना: ये उन्मुक्त और रचनात्मक सपने ही धरती को स्वर्ग बनाने का 'शिल्प' (कला या तरीका) सिखाते हैं। इसका अर्थ है कि स्वतंत्र विचार और असीम कल्पनाएँ ही हमारे समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकती हैं।
- ✦ कवयित्री का संक्षिप्त परिचय: महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की सुप्रसिद्ध लेखिका और बहुमुखी प्रतिभा संपन्न चित्रकार थीं। उनका जन्म 1907 में हुआ था। उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 'नीहार', 'रश्मि', 'नीरजा' और 'दीपशिखा' उनके प्रमुख कविता-संग्रह हैं।
निष्कर्ष एवं मुख्य संदेश
कविता हमें यह सिखाती है कि व्यक्ति की कल्पनाओं और विचारों को कभी भी सीमाओं में कैद नहीं करना चाहिए। सपनों को पूरा करने की आज़ादी ही मनुष्य को यथार्थ में कुछ नया और महान रचने की प्रेरणा देती है। आज़ाद सपने ही हमारी दुनिया को स्वर्ग के समान सुंदर बनाते हैं।
Quick Navigation:
| |
1 / 1
Quick Navigation:
| |