ल्हासा की ओर
प्रश्न-अभ्यास
1. थोङ्ला के पहले के आखिरी गाँव पहुँचने पर भिखमंगे के वेश में होने के बावजूद लेखक को ठहरने के लिए उचित स्थान मिला जबकि दूसरी यात्रा के समय भद्र वेश भी उन्हें उचित स्थान नहीं दिला सका। क्यों?
इसका मुख्य कारण यह था कि पहली बार लेखक के साथ बौद्ध भिक्षु सुमति थे। सुमति की उस गाँव में अच्छी जान-पहचान थी, इसलिए भिखमंगे के वेश में होने के बावजूद उन्हें रहने की अच्छी जगह मिल गई।
दूसरी यात्रा के समय लेखक भद्र (सभ्य) वेश में थे, पर उनके साथ सुमति नहीं थे। साथ ही, वे शाम के वक्त पहुँचे थे। उस समय गाँव के लोग 'छङ्' (एक प्रकार का नशीला पेय) पीकर अपने होश-हवास खो बैठते थे और उन्हें अच्छे-बुरे की पहचान नहीं रहती थी। इसलिए उन्हें ठहरने के लिए उचित स्थान नहीं मिला और गरीब झोपड़े में रहना पड़ा।
2. उस समय के तिब्बत में हथियार का कानून न रहने के कारण यात्रियों को किस प्रकार का भय बना रहता था?
उस समय तिब्बत में हथियार रखने को लेकर कोई कानून नहीं था। इस कारण लोग अपनी सुरक्षा के लिए लाठी की तरह पिस्तौल और बंदूक लेकर खुलेआम घूमते थे। वहाँ के निर्जन स्थानों और पहाड़ों (डाँड़ा) पर डाकुओं का भय हमेशा बना रहता था। डाकू यात्रियों को पहले मार देते थे और फिर देखते थे कि उनके पास पैसा या सामान है या नहीं। पुलिस और खुफिया विभाग भी वहाँ सक्रिय नहीं थे, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता था।
3. लेखक लङ्ङ्कोर के मार्ग में अपने साथियों से किस कारण पिछड़ गया?
लेखक के पिछड़ने के दो मुख्य कारण थे:
1. घोड़े की सुस्त चाल: लेखक को जो घोड़ा मिला था, वह बहुत सुस्त था। वह धीरे-धीरे चल रहा था, जिससे लेखक अपने साथियों से पीछे रह गए।
2. रास्ता भटकना: एक जगह दो रास्ते फूट रहे थे। लेखक ने गलती से बाएँ वाला रास्ता ले लिया और डेढ़ मील आगे चले गए। बाद में पूछने पर पता चला कि सही रास्ता दाहिने वाला था, तो उन्हें वापस लौटना पड़ा।
4. लेखक ने शेकर विहार में सुमति को उनके यजमानों के पास जाने से रोका, परंतु दूसरी बार रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया?
पहली बार लेखक ने सुमति को इसलिए रोका क्योंकि यजमानों के पास जाने में उन्हें बहुत समय लगता और वे हफ्ता-भर लगा देते, जिससे यात्रा में देरी होती।
दूसरी बार लेखक ने उन्हें नहीं रोका क्योंकि लेखक को शेकर विहार के मंदिर में बुद्धवचन-अनुवाद (कन्जुर) की 103 हस्तलिखित पोथियाँ मिल गई थीं। लेखक उन दुर्लभ पुस्तकों को पढ़ने में रम गए थे ("पुस्तकों के भीतर थे"), इसलिए वे चाहते थे कि सुमति चले जाएँ ताकि वे एकांत में अध्ययन कर सकें।
5. अपनी यात्रा के दौरान लेखक को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
लेखक को निम्नलिखित कठिनाइयों का सामना करना पड़ा:
1. दुर्गम रास्ते: ऊँचे-नीचे पहाड़ी रास्ते और 'डाँड़ा' जैसे खतरनाक स्थानों को पार करना पड़ा।
2. डाकुओं का भय: रास्ते में चोरी और डकैती का डर था, इसलिए उन्हें भिखमंगे का वेश धारण करना पड़ा।
3. मौसम की मार: तेज़ धूप में ललाट जलता था और पीछे का हिस्सा बर्फ जैसा ठंड़ा हो जाता था।
4. शारीरिक कष्ट: पीठ पर भारी सामान लादकर पैदल चलना पड़ा।
5. सुस्त घोड़ा: वापसी में घोड़ा सुस्त मिलने के कारण वे रास्ता भटक गए और पिछड़ गए।
6. प्रस्तुत यात्रा-वृत्तांत के आधार पर बताइए कि उस समय का तिब्बती समाज कैसा था?
उस समय का तिब्बती समाज काफी खुला और उदार था:
1. छुआछूत का अभाव: वहाँ जाति-पाँति और छुआछूत जैसी कुप्रथाएँ नहीं थीं।
2. महिलाओं की स्थिति: औरतें परदा नहीं करती थीं और अपरिचित यात्रियों को भी चाय बनाकर देती थीं।
3. अतिथि सत्कार: लोग यात्रियों का सहयोग करते थे (हालाँकि शाम को नशें में होने पर स्थिति अलग होती थी)।
4. अंधविश्वास: लोग धर्म में आस्था रखते थे और 'गंडा' (मंत्र फूँका हुआ कपड़ा) पर विश्वास करते थे।
5. जागीरदारी प्रथा: जमीन जागीरदारों में बंटी थी जिसका नियंत्रण मठों के हाथ में था और मजदूर बेगार में काम करते थे।
7. 'मैं अब पुस्तकों के भीतर था।' नीचे दिए गए विकल्पों में से कौन सा इस वाक्य का अर्थ बतलाता है-
(क) लेखक पुस्तकें पढ़ने में रम गया।
(ख) लेखक पुस्तकों की शैल्फ़ के भीतर चला गया।
(ग) लेखक के चारों ओर पुस्तकें ही थीं।
(घ) पुस्तक में लेखक का परिचय और चित्र छपा था।
उत्तर: (क) लेखक पुस्तकें पढ़ने में रम गया।
(व्याख्या: इसका अर्थ है कि लेखक का पूरा ध्यान पुस्तकों को पढ़ने में केंद्रित हो गया था।)
रचना और अभिव्यक्ति
8. सुमति के यजमान और अन्य परिचित लोग लगभग हर गाँव में मिले। इस आधार पर आप सुमति के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का चित्रण कर सकते हैं?
सुमति के व्यक्तित्व की विशेषताएँ:
1. मिलनसार: उनका स्वभाव बहुत मिलनसार था, जिससे हर जगह उनके परिचित बन जाते थे।
2. धार्मिक प्रवृत्ति: वे एक बौद्ध भिक्षु थे और लोगों को बोधगया के गंडे (ताबीज) बांटते थे, जिससे लोगों में उनका सम्मान था।
3. मददगार: वे लेखक की यात्रा में हर संभव सहायता करते थे।
4. समय के पाबंद: यद्यपि वे जल्दी गुस्सा होते थे, लेकिन शांत भी जल्दी हो जाते थे।
9. 'हालाँकि उस वक्त मेरा भेष ऐसा नहीं था कि उन्हें कुछ भी खयाल करना चाहिए था।'- उक्त कथन के अनुसार हमारे आचार-व्यवहार के तरीके वेशभूषा के आधार पर तय होते हैं। आपकी समझ से यह उचित है अथवा अनुचित, विचार व्यक्त करें।
सामान्यत: यह देखा जाता है कि लोग व्यक्ति के कपड़ों और बाहरी दिखावे से उसका स्तर तय करते हैं और उसी अनुसार व्यवहार करते हैं।
मेरी समझ से यह अनुचित है। किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं बल्कि उसके गुणों, चरित्र और व्यवहार से होनी चाहिए। अच्छे कपड़े पहनने वाला व्यक्ति बुरा हो सकता है और साधारण या फटे कपड़े पहनने वाला व्यक्ति महान हो सकता है (जैसे इस पाठ में लेखक भिखमंगे के वेश में भी एक विद्वान यात्री था)। वेशभूषा केवल बाहरी आवरण है, वह व्यक्ति की वास्तविकता नहीं है।
10. यात्रा-वृत्तांत के आधार पर तिब्बत की भौगोलिक स्थिति का शब्द-चित्र प्रस्तुत करें। वहाँ की स्थिति आपके राज्य/शहर से किस प्रकार भिन्न है?
तिब्बत की भौगोलिक स्थिति: तिब्बत एक पहाड़ी प्रदेश है जो समुद्र तल से 16-17 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ रास्ते उबड़-खाबड़ और दुर्गम हैं। यहाँ दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं होती। यहाँ के पहाड़ कहीं बिल्कुल नंगे (वनस्पति रहित) हैं तो कहीं बर्फ से ढके हैं। यहाँ की जलवायु विचित्र है - धूप में सामने से गर्मी लगती है और छाया में या पीछे से कड़ाके की ठंड।
भिन्नता: यह हमारे मैदानी इलाकों (शहर/राज्य) से बिल्कुल भिन्न है। हमारे यहाँ समतल भूमि, घनी आबादी और मौसम सामान्य रहता है, जबकि वहाँ जीवन अत्यंत कठोर और दुर्गम है।
11. आपने भी किसी स्थान की यात्रा अवश्य की होगी? यात्रा के दौरान हुए अनुभवों को लिखकर प्रस्तुत करें।
(विद्यार्थी इस प्रश्न का उत्तर अपने निजी अनुभव के आधार पर लिख सकते हैं। उदाहरण स्वरूप:)
पिछली गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने परिवार के साथ शिमला गया। पहाड़ी रास्ता बहुत घुमावदार था जिससे थोड़ा डर भी लग रहा था। वहाँ का मौसम बहुत सुहावना था। हमने मॉल रोड पर घूमते हुए स्थानीय भोजन का आनंद लिया। वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ों के नज़ारे अद्भुत थे। वापसी में हमारी गाड़ी खराब हो गई थी, जिससे हमें थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन कुल मिलाकर यह एक यादगार यात्रा थी।
12. यात्रा-वृत्तांत गद्य साहित्य की एक विधा है। आपकी इस पाठ्यपुस्तक में कौन-कौन सी विधाएँ हैं? प्रस्तुत विधा उनसे किन मायनों में अलग है?
हमारी पाठ्यपुस्तक में कहानी, कविता, निबंध, संस्मरण, व्यंग्य आदि विधाएँ हैं।
यात्रा-वृत्तांत की विशेषता: यह अन्य विधाओं से इस मायने में अलग है कि इसमें लेखक किसी स्थान विशेष की अपनी वास्तविक यात्रा का वर्णन करता है। इसमें उस स्थान के भूगोल, संस्कृति, समाज और लेखक के निजी अनुभवों का मिश्रण होता है। यह कल्पना पर आधारित न होकर यथार्थ (सच्चाई) पर आधारित होता है और पाठक को उस स्थान के बारे में जानकारी देता है।
भाषा-अध्ययन
13. किसी भी बात को अनेक प्रकार से कहा जा सकता है, जैसे- सुबह होने से पहले हम गाँव में थे। पौ फटने वाली थी कि हम गाँव में थे। तारों की छाँव रहते-रहते हम गाँव पहुँच गए।
नीचे दिए गए वाक्य को अलग-अलग तरीके से लिखिए-
'जान नहीं पड़ता था कि घोड़ा आगे जा रहा है या पीछे।'
इस वाक्य को अन्य तरीकों से इस प्रकार लिखा जा सकता है:
1. घोड़े की चाल इतनी धीमी थी कि पता ही नहीं चलता था कि वह आगे बढ़ रहा है या पीछे।
2. घोड़ा इतना सुस्त था कि गति का आभास ही नहीं हो रहा था।
3. यह समझना मुश्किल था कि घोड़ा आगे की ओर चल रहा है या पीछे की ओर।
14. ऐसे शब्द जो किसी 'अंचल' यानी क्षेत्र विशेष में प्रयुक्त होते हैं उन्हें आंचलिक शब्द कहा जाता है। प्रस्तुत पाठ में से आंचलिक शब्द ढूँढ़कर लिखिए।
पाठ में प्रयुक्त आंचलिक (तिब्बती व स्थानीय) शब्द:
1. छङ्: (एक प्रकार का नशीला पेय)
2. भरिया: (भार ढोने वाला)
3. थुक्पा: (सत्तू या चावल के साथ बना खाद्य पदार्थ)
4. गंडा: (मंत्र पढ़ा हुआ धागा/कपड़ा)
5. डाँड़ा: (ऊँची ज़मीन/पहाड़)
6. कंडे: (गोबर के उपले)
7. खोटी: (मिट्टी का टोटीदार बर्तन)
8. कन्जुर: (बुद्धवचन अनुवाद की पोथियाँ)
15. पाठ में कागज, अक्षर, मैदान के आगे क्रमशः मोटे, अच्छे और विशाल शब्दों का प्रयोग हुआ है। इन शब्दों से उनकी विशेषता उभर कर आती है। पाठ में से कुछ ऐसे ही और शब्द छाँटिए जो किसी की विशेषता बता रहे हों।
विशेषता बताने वाले शब्द (विशेषण) और विशेष्य:
1. बर्फ़ीली (चोटियाँ)
2. भीषण (गर्मी/धूप)
3. गरमागरम (थुक्पा)
4. श्वेत (शिखर)
5. नंगे (पहाड़)
6. भद्र (वेश)
7. हस्तलिखित (पोथियाँ)
8. विकल (डाँड़ा - यहाँ 'विकट' शब्द पाठ में है) -> विकट (डाँड़ा)
9. पतली (बत्तियाँ)
अपठित गद्यांश (पाठेतर सक्रियता)
(1) कौन-सी आपदा को सुनामी कहा जाता है?
समुद्री भूकंप से उठने वाली तूफ़ानी लहरों के प्रकोप को सुनामी कहा जाता है। ये लहरें समुद्र तट के इलाकों में भारी तबाही मचाती हैं।
(2) 'दुख जीवन को माँजता है, उसे आगे बढ़ने का हुनर सिखाता है'- आशय स्पष्ट कीजिए।
आशय: दुख और कठिनाइयाँ मनुष्य की परीक्षा लेती हैं और उसे मजबूत बनाती हैं। जिस प्रकार बर्तन को माँजने से वह चमक उठता है, उसी प्रकार दुख सहने से मनुष्य का व्यक्तित्व निखरता है। उसे जीवन की असली कीमत समझ आती है और वह नई शक्ति के साथ भविष्य की ओर बढ़ना सीखता है।
(3) मैगी, मेघना और अरुण ने सुनामी जैसी आपदा का सामना किस प्रकार किया?
* मेघना और अरुण: 13 वर्षीय मेघना और अरुण दो दिन तक अकेले समुद्र में तैरते रहे और जीव-जंतुओं से मुकाबला करते हुए अंततः किनारे आ लगे।
* मैगी: मछुआरे की बेटी मैगी ने अपनी सूझबूझ से काम लिया। उसने समुद्र के शोर से खतरे को पहचाना और अपना बेड़ा उठाकर अपने परिजनों व अन्य 41 लोगों की जान बचाई।
(4) प्रस्तुत गद्यांश में 'दृढ़ निश्चय' और 'महत्व' के लिए किन शब्दों का प्रयोग हुआ है?
* 'दृढ़ निश्चय' के लिए प्रयुक्त शब्द: बुलंद इरादे
* 'महत्व' के लिए प्रयुक्त शब्द: अहमियत
(5) इस गद्यांश के लिए एक शीर्षक 'नाराज समुद्र' हो सकता है। आप कोई अन्य शीर्षक दीजिए।
अन्य उपयुक्त शीर्षक: 'मानवता की जीत' या 'प्रकृति का कहर और इंसानी हौसला'