मेरे बचपन के दिन
प्रश्न-अभ्यास
1. 'मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।' इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि-
(क) उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी?
उस समय (20वीं शताब्दी के प्रारंभ में) लड़कियों की दशा बहुत दयनीय थी। समाज में लड़की के जन्म को अच्छा नहीं माना जाता था। लेखिका ने बताया है कि उनके परिवार में 200 वर्षों तक कोई लड़की नहीं हुई थी और उससे पहले लड़कियों को पैदा होते ही 'परमधाम' भेज दिया जाता था (मार दिया जाता था)। उन्हें लड़कों की तरह शिक्षा और सम्मान नहीं मिलता था और पर्दा प्रथा व बाल-विवाह जैसी कुरीतियों का सामना करना पड़ता था।
(ख) लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं?
आज लड़कियों के जन्म के संबंध में परिस्थितियाँ काफी सुधरी हैं, लेकिन पूरी तरह आदर्श नहीं हैं। शहरी और शिक्षित समाज में लड़कियों को लड़कों के समान प्यार और अधिकार मिलते हैं। शिक्षा और करियर में वे आगे बढ़ रही हैं। लेकिन, अभी भी ग्रामीण और रूढ़िवादी इलाकों में कन्या भ्रूण हत्या और भेदभाव की खबरें आती रहती हैं। सरकारी प्रयासों (जैसे 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ') से जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन समाज की मानसिकता पूरी तरह बदलने में अभी समय लगेगा।
2. लेखिका उर्दू-फ़ारसी क्यों नहीं सीख पाईं?
लेखिका के बाबा चाहते थे कि वे उर्दू-फ़ारसी सीखें, लेकिन लेखिका को इसमें बिल्कुल रुचि नहीं थी। उन्हें लगता था कि यह उनके वश की बात नहीं है। जब मौलवी साहब उन्हें पढ़ाने आए, तो वे डरकर चारपाई के नीचे छिप गईं। उनकी अरुचि और डर के कारण ही वे उर्दू-फ़ारसी नहीं सीख पाईं, जबकि उन्होंने संस्कृत और हिंदी में विशेष रुचि दिखाई।
3. लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है:
1. धार्मिक प्रवृत्ति: वे ईश्वर में बहुत आस्था रखती थीं और नियमित पूजा-पाठ करती थीं।
2. साहित्यिक रुचि: वे हिंदी जानती थीं और लिखना-पढ़ना पसंद करती थीं।
3. संगीत प्रेम: उन्हें मीरा के पद बहुत पसंद थे और वे सवेरे 'जागिए कृपानिधान' और शाम को मीरा के पद गाती थीं।
4. प्रेरणा स्रोत: माँ ने ही लेखिका को 'पंचतंत्र' पढ़ना सिखाया और साहित्य व संगीत के संस्कार दिए।
4. जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा क्यों कहा है?
लेखिका ने उन संबंधों को स्वप्न जैसा इसलिए कहा है क्योंकि उस समय हिंदू और मुस्लिम परिवारों में बहुत गहरा प्रेम और अपनापन था। धर्म अलग होने के बावजूद वे एक ही परिवार की तरह रहते थे। नवाब साहब की बेगम लेखिका की माँ को 'दुलहन' और लेखिका उन्हें 'ताई' कहती थीं। वे एक-दूसरे के त्योहार (राखी, मुहर्रम) मिल-जुलकर मनाते थे।
आज के समय में सांप्रदायिकता और धार्मिक भेदभाव बढ़ गया है, जिससे दो धर्मों के बीच ऐसा निस्वार्थ और आत्मीय रिश्ता दुर्लभ हो गया है। इसलिए वह बीता हुआ समय आज एक मीठे सपने जैसा लगता है।
रचना और अभिव्यक्ति
5. जेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थी। जेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं/होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती?
यदि मैं जेबुन्निसा के स्थान पर होती/होता, तो महादेवी जी से मेरी अपेक्षा यह होती कि वे भी मुझे अपनी कविताओं और साहित्य के बारे में बताएँ। मैं चाहता/चाहती कि वे मुझे अपनी लिखी हुई नई कविताएँ सुनाएँ और मुझे भी साहित्य पढ़ने और समझने के लिए प्रेरित करें। मैं उनसे एक दोस्त और मार्गदर्शक जैसा व्यवहार पाने की उम्मीद करता/करती।
6. महादेवी वर्मा को काव्य प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का कोई पुरस्कार मिला हो और वह देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे/करेंगी?
अगर मुझे कोई बहुमूल्य पुरस्कार मिलता और उसे देशहित या आपदा निवारण के लिए देना पड़ता, तो मुझे बहुत गर्व और खुशी का अनुभव होता। पुरस्कार का असली मान उसे अपनी अलमारी में सजाने में नहीं, बल्कि किसी के काम आने में है। जैसा महादेवी जी को बापू को कटोरा देकर खुशी हुई, वैसे ही मुझे भी लगेगा कि मेरी उपलब्धि देश के काम आ सकी। यह मेरे लिए पुरस्कार से भी बड़ा सम्मान होगा।
7. लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।
लेखिका ने बताया है कि उनके छात्रावास (होस्टल) में अलग-अलग जगहों से आई लड़कियाँ रहती थीं। कोई अवध से थी तो कोई बुंदेलखंड से, कोई मराठी थी तो कोई हिंदी भाषी। वे सब आपस में अपनी-अपनी बोलियों (अवधी, बुंदेली, मराठी) में बात करती थीं। लेकिन पढ़ाई सब हिंदी में करती थीं और एक ही मेस में खाना खाती थीं। वहाँ भाषा या धर्म को लेकर कोई झगड़ा नहीं होता था, सब मिल-जुलकर बहनों की तरह रहती थीं।
8. महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस पटल पर भी अपने बचपन की कोई स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।
(विद्यार्थी इसे अपने निजी अनुभव से लिखें। उदाहरण:)
मुझे याद है जब मैं पाँच साल का था, तो मुझे स्कूल जाने से बहुत डर लगता था। पहले दिन मैं गेट पर ही ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा था। लेकिन मेरी क्लास टीचर बहुत अच्छी थीं। उन्होंने मुझे गोद में उठाया और एक टॉफी दी। उन्होंने मुझे रंग-बिरंगे खिलौने दिखाए। धीरे-धीरे मेरा डर खत्म हो गया और मैं रोज़ स्कूल जाने की ज़िद करने लगा। वह पहला दिन और टीचर का प्यार मुझे आज भी याद है।
9. महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होने वाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस पर डायरी का एक पृष्ठ लिखिए।
दिनांक: 10 जनवरी, 202X
समय: रात 9 बजे
आज स्कूल का वार्षिक उत्सव था। मैंने भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया था। जब मेरा नाम पुकारा जाने वाला था, तो मेरे दिल की धड़कनें बहुत तेज हो गई थीं। हाथ-पैर ठंडे पड़ रहे थे और गला सूख रहा था। मन में बार-बार आ रहा था कि कहीं मैं अपनी लाइनें न भूल जाऊँ। सब लोग मुझे ही देख रहे थे। लेकिन जैसे ही मैं माइक के सामने पहुँचा और बोलना शुरू किया, सारा डर गायब हो गया। जब खत्म होने पर सबने तालियाँ बजाईं, तो सारी घबराहट खुशी में बदल गई। सचमुच, मंच पर जाने से पहले की वह बेचैनी बहुत अजीब होती है!
- (आपका नाम)
भाषा-अध्ययन
10. पाठ से निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए-
विद्वान, अनंत, निरपराधी, दंड, शांति।
1. विद्वान - विदुषी (पाठ में प्रयुक्त स्त्रीलिंग रूप)
2. अनंत - अंत
3. निरपराधी - अपराधी
4. दंड - पुरस्कार
5. शांति - बेचैनी (या अशांति)
11. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग/प्रत्यय अलग कीजिए और मूल शब्द बताइए-
1. निराहारी: निर् (उपसर्ग) + आहार (मूल शब्द) + ई (प्रत्यय)
2. सांप्रदायिकता: संप्रदाय (मूल शब्द) + इक (प्रत्यय) + ता (प्रत्यय)
3. अप्रसन्नता: अ (उपसर्ग) + प्रसन्न (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)
4. अपनापन: अपना (मूल शब्द) + पन (प्रत्यय)
5. किनारीदार: किनारी (मूल शब्द) + दार (प्रत्यय)
6. स्वतंत्रता: स्व (उपसर्ग) + तंत्र (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)
12. निम्नलिखित उपसर्ग-प्रत्ययों की सहायता से दो-दो शब्द लिखिए-
अन्, अ, सत्, स्व, दुर्
दार, हार, वाला, अनीय
उपसर्ग से शब्द:
* अन्: अनपढ़, अनजान
* अ: असत्य, अन्याय
* सत्: सत्कर्म, सज्जन (सत्+जन)
* स्व: स्वराज, स्वदेश
* दुर्: दुर्बल, दुर्भाग्य
प्रत्यय से शब्द:
* दार: दुकानदार, समझदार
* हार: पालनहार, होनहार
* वाला: चायवाला, फलवाला
* अनीय: पठनीय, माननीय