नेताजी का चश्मा
प्रश्न-अभ्यास1. सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
उत्तर: चश्मेवाला यद्यपि कोई सेनानी या फौजी नहीं था, फिर भी लोग उसे 'कैप्टन' कहते थे। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:
1. उसके मन में देश और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति अगाध सम्मान और देशभक्ति की भावना थी। वह नेताजी की मूर्ति को बिना चश्मे के देखकर आहत होता था और अपनी ओर से चश्मा लगाता था।
2. उसकी इस त्याग और समर्पण वाली देशभक्ति को देखकर लोग सम्मान स्वरूप या शायद व्यंग्य में भी उसे 'कैप्टन' कहकर पुकारते थे।
3. उसमें फौजियों जैसा अनुशासन और देश-प्रेम का जज्बा था।
2. हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा-
(क) हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?
उत्तर: हालदार साहब इसलिए मायूस हो गए थे क्योंकि वे जानते थे कि कैप्टन (चश्मेवाला) मर चुका है। उन्हें लगा कि अब नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाने वाला कोई नहीं बचा होगा। बिना चश्मे के नेताजी की मूर्ति उन्हें अधूरी और उपेक्षित लगेगी, जो उनसे देखी नहीं जाएगी। देशभक्ति की यह शून्यता उन्हें दुखी कर रही थी।
(ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?
उत्तर: मूर्ति पर बच्चों द्वारा बनाया गया सरकंडे का चश्मा यह उम्मीद जगाता है कि देश में देशभक्ति की भावना अभी समाप्त नहीं हुई है। नई पीढ़ी (बच्चों) के मन में भी स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान है। यह इस बात का प्रतीक है कि भविष्य में भी देश की धरोहर और देशभक्ति सुरक्षित हाथों में है।
(ग) हालदार साहब इतनी सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?
उत्तर: हालदार साहब को लगा था कि कैप्टन के मरने के बाद कस्बे में देशभक्ति खत्म हो गई होगी। लेकिन जब उन्होंने नन्हें बच्चों के हाथों से बना सरकंडे का चश्मा मूर्ति पर देखा, तो उनकी निराशा आशा में बदल गई। यह देखकर उनका हृदय भर आया कि बड़ों में न सही, पर बच्चों में अभी भी देश-प्रेम जीवित है। यह संतोष और भावुकता के क्षण थे।
3. आशय स्पष्ट कीजिए-
"बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी जवानी जिंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।"
उत्तर: आशय: इस पंक्ति में लेखक ने समाज की गिरती हुई नैतिक मूल्यों और देशभक्ति के अभाव पर चिंता व्यक्त की है। लेखक कहना चाहते हैं कि जो लोग (जैसे कैप्टन) देश के लिए अपना सब कुछ त्याग देते हैं और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं, आज का समाज उनका मजाक उड़ाता है और उन्हें पागल समझता है। दूसरी ओर, वही समाज अपने छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए अपने ईमान और सिद्धांतों को बेचने के लिए तैयार रहता है। जिस देश के लोग स्वार्थी हो जाएं और देशभक्तों का सम्मान करना भूल जाएं, उस देश का भविष्य उज्ज्वल नहीं हो सकता।
4. पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: पानवाला सड़क के चौराहे पर दुकान करता है। वह एक काला और मोटा आदमी है। उसकी तोंद निकली हुई है, जो उसके हँसने पर थिरकती है। वह हर वक्त मुँह में पान ठूँसे रहता है, जिससे उसकी बत्तीसी लाल-काली हो गई है। वह स्वभाव से खुशमिजाज और वाकपटु है, लेकिन कई बार उसकी बातें व्यंग्यात्मक और रूखी होती हैं। वह बातें बनाने में माहिर है, पर अंदर से वह भावुक भी है (जैसे कैप्टन की मौत पर वह उदास हो जाता है)।
5. "वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल !"
कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
उत्तर: पानवाले की यह टिप्पणी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीन है। यह किसी की शारीरिक अक्षमता और उसकी भावनाओं का मजाक उड़ाने वाली बात है। कैप्टन भले ही शारीरिक रूप से अपंग था, लेकिन मानसिक रूप से वह एक सच्चा देशभक्त था। पानवाले द्वारा उसे 'पागल' कहना, समाज की उस विकृत मानसिकता को दर्शाता है जो त्याग और समर्पण को पागलपन समझती है। एक देशभक्त का इस तरह अपमान करना उचित नहीं है।
रचना और अभिव्यक्ति
6. निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं-
(क) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।
उत्तर: यह वाक्य हालदार साहब की देशभक्ति और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति गहरे सम्मान की ओर संकेत करता है। वे नेताजी के व्यक्तित्व से प्रभावित थे।
(ख) पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखें पोंछता हुआ बोला-साहब! कैप्टन मर गया।
उत्तर: यह वाक्य दर्शाता है कि पानवाला भले ही ऊपर से कठोर और मज़ाकिया स्वभाव का दिखता हो, लेकिन अंदर से वह संवेदनशील और भावुक इंसान है। कैप्टन के प्रति उसके मन में सहानुभूति और जुड़ाव था।
(ग) कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।
उत्तर: यह वाक्य कैप्टन की अनन्य देशभक्ति, दृढ़ संकल्प और नेताजी के प्रति आदर भाव को दर्शाता है। उसे नेताजी की अधूरी मूर्ति (बिना चश्मे के) सहन नहीं होती थी।
7. जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात् देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।
उत्तर: कैप्टन को देखने से पहले हालदार साहब सोचते होंगे कि 'कैप्टन' नाम वाला व्यक्ति कोई लंबा-चौड़ा, हट्टा-कट्टा और रोबदार फौजी रहा होगा। उसकी घनी मूँछें होंगी और वह अनुशासित चाल में चलता होगा। वे सोचते होंगे कि वह शायद आज़ाद हिंद फौज का कोई भूतपूर्व सिपाही होगा जिसका व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली होगा। उन्होंने कभी कल्पना नहीं की होगी कि कैप्टन एक बूढ़ा और मरियल-सा लँगड़ा आदमी होगा।
8. कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है-
(क) इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं?
उत्तर: महापुरुषों की मूर्तियाँ लगाने का मुख्य उद्देश्य उनकी स्मृति को बनाए रखना और नई पीढ़ी को उनके महान कार्यों, त्याग और आदर्शों से परिचित कराना होता है। ताकि लोग उनसे प्रेरणा ले सकें और देश/समाज के लिए अच्छे कार्य करें। यह शहर की सुंदरता बढ़ाने का भी एक माध्यम होता है।
(ख) आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर: मैं अपने इलाके के चौराहे पर स्वामी विवेकानंद या महात्मा गांधी (विद्यार्थी अपनी पसंद का कोई भी नाम लिख सकते हैं) की मूर्ति स्थापित करवाना चाहूँगा। क्योंकि उनके विचार और जीवन दर्शन आज के युवाओं को सही दिशा दिखाने और समाज में शांति व भाईचारा बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
(ग) उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?
उत्तर: हमारा उत्तरदायित्व है कि हम उस मूर्ति की साफ-सफाई का ध्यान रखें। मूर्ति का सम्मान करें और उसे किसी भी तरह से क्षतिग्रस्त या गंदा न होने दें। विशेष अवसरों पर (जैसे उनकी जयंती पर) वहाँ माल्यार्पण करें और उनके विचारों को याद करें। मूर्ति केवल सजावट की वस्तु नहीं, बल्कि श्रद्धा का केंद्र होनी चाहिए।
9. सीमा पर तैनात फ़ौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यों में किसी न किसी रूप में देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे-सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन-जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमल भी कीजिए।
उत्तर: हम अपने दैनिक जीवन में निम्नलिखित कार्यों द्वारा देश-प्रेम प्रकट कर सकते हैं:
1. बिजली और पानी की बचत करके।
2. यातायात के नियमों का पालन करके।
3. अपने आस-पास सफाई रखकर और कचरा कूड़ेदान में डालकर।
4. भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का विरोध करके।
5. जरूरतमंदों की मदद करके और समाज में भाईचारा बनाकर।
6. प्लास्टिक का उपयोग कम करके पर्यावरण को बचाकर।
10. निम्नलिखित पंक्तियों में स्थानीय बोली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, आप इन पंक्तियों को मानक हिंदी में लिखिए-
कोई गिराक आ गया समझो। उसको चौड़े चौखट चाहिए। तो कैप्टन किधर से लाएगा? तो उसको मूर्तिवाला दे दिया। उदर दूसरा बिठा दिया।
उत्तर: मानक हिंदी रूपांतरण:
मान लो, कोई ग्राहक आ गया। उसे चौड़ा फ्रेम (चौखट) चाहिए। तो कैप्टन कहाँ से लाएगा? इसलिए उसने उसे (ग्राहक को) मूर्तिवाला फ्रेम दे दिया और उधर (मूर्ति पर) दूसरा चश्मा लगा दिया।
11. 'भई खूब! क्या आइडिया है।' इस वाक्य को ध्यान में रखते हुए बताइए कि एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से क्या लाभ होते हैं?
उत्तर: एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों (जैसे यहाँ 'आइडिया' शब्द अंग्रेजी का है) के आने से भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता बढ़ती है। भाषा अधिक सहज, प्रवाहमयी और आधुनिक बनती है। इससे बात को कम शब्दों में और अधिक प्रभावशाली ढंग से कहने में मदद मिलती है। यह 'मिश्रित भाषा' आम बोलचाल के ज्यादा करीब होती है, जिससे पाठक या श्रोता उसे जल्दी समझ पाते हैं।
भाषा-अध्ययन
12. निम्नलिखित वाक्यों से निपात छाँटिए और उनसे नए वाक्य बनाइए-
(क) नगरपालिका थी तो कुछ न कुछ करती भी रहती थी।
उत्तर: निपात: तो, भी
वाक्य (तो): तुम बुलाओगे तो मैं जरूर आऊँगा।
वाक्य (भी): मुझे भी तुम्हारे साथ चलना है।
(ख) किसी स्थानीय कलाकार को ही अवसर देने का निर्णय किया गया होगा।
उत्तर: निपात: ही
वाक्य: यह काम राम ही कर सकता है।
(ग) यानी चश्मा तो था लेकिन संगमरमर का नहीं था।
उत्तर: निपात: तो
वाक्य: वह गया तो था, पर मिला नहीं।
(घ) हालदार साहब अब भी नहीं समझ पाए।
उत्तर: निपात: भी
वाक्य: उसने अभी भी अपनी गलती नहीं मानी।
(ङ) दो साल तक हालदार साहब अपने काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुज़रते रहे।
उत्तर: निपात: तक
वाक्य: उसने मुझे देखा तक नहीं।
13. निम्नलिखित वाक्यों को कर्मवाच्य में बदलिए-
(क) वह अपनी छोटी-सी दुकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से नेताजी की मूर्ति पर फिट कर देता है।
उत्तर: उसके द्वारा अपनी छोटी-सी दुकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से (एक) नेताजी की मूर्ति पर फिट कर दिया जाता है।
(ख) पानवाला नया पान खा रहा था।
उत्तर: पानवाले द्वारा नया पान खाया जा रहा था।
(ग) पानवाले ने साफ़ बता दिया था।
उत्तर: पानवाले द्वारा साफ़ बता दिया गया था।
(घ) ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे।
उत्तर: ड्राइवर द्वारा ज़ोर से ब्रेक मारे गए।
(ङ) नेताजी ने देश के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया।
उत्तर: नेताजी द्वारा देश के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया गया।
(च) हालदार साहब ने चश्मेवाले की देशभक्ति का सम्मान किया।
उत्तर: हालदार साहब द्वारा चश्मेवाले की देशभक्ति का सम्मान किया गया।
14. नीचे लिखे वाक्यों को भाववाच्य में बदलिए-
जैसे-अब चलते हैं।
अब चला जाए।
(क) माँ बैठ नहीं सकती।
उत्तर: माँ से बैठा नहीं जाता।
(ख) मैं देख नहीं सकती।
उत्तर: मुझसे देखा नहीं जाता।
(ग) चलो, अब सोते हैं।
उत्तर: चलो, अब सोया जाए।
(घ) माँ रो भी नहीं सकती।
उत्तर: माँ से रोया भी नहीं जाता।
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Question
स्वयं प्रकाश का जन्म किस वर्ष और कहाँ हुआ था?
Answer
उनका जन्म वर्ष $1947$ में इंदौर (मध्य प्रदेश) में हुआ था।
Question
स्वयं प्रकाश ने किस विषय में पढ़ाई की थी?
Answer
उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।
Question
स्वयं प्रकाश किस पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे?
Answer
वे 'वसुधा' पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे।
Question
स्वयं प्रकाश की मृत्यु किस वर्ष हुई?
Answer
उनकी मृत्यु वर्ष $2019$ में हुई।
Question
स्वयं प्रकाश के किन्हीं दो कहानी संग्रहों के नाम बताइए।
Answer
'सूरज कब निकलेगा' और 'आएंगे अच्छे दिन भी' उनके प्रमुख कहानी संग्रह हैं।
Question
स्वयं प्रकाश के किन्हीं दो चर्चित उपन्यासों के नाम क्या हैं?
Answer
'बीच में विनय' और 'ईंधन' उनके चर्चित उपन्यास हैं।
Question
स्वयं प्रकाश की कहानियों में मुख्य रूप से किसका चित्रण मिलता है?
Answer
उनकी कहानियों में मध्यमवर्गीय जीवन का कुशल चित्रण मिलता है।
Question
लेखक के अनुसार 'देश' किन चीजों से मिलकर बनता है?
Answer
देश नागरिकों, नदियों, पहाड़ों, पेड़-पौधों, वनस्पतियों और पशु-पक्षियों से मिलकर बनता है।
Question
पाठ के अनुसार 'देशभक्ति' क्या है?
Answer
देश की सभी संपदाओं से प्रेम करना और उनकी समृद्धि के लिए प्रयास करना ही देशभक्ति है।
Question
'नेताजी का चश्मा' कहानी किसके योगदान को रेखांकित करती है?
Answer
यह कहानी देश के करोड़ों नागरिकों (कैप्टन चश्मेवाले सहित) के योगदान को रेखांकित करती है।
Question
हालदार साहब को हर कितने दिन बाद कस्बे से गुजरना पड़ता था?
Answer
उन्हें हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम के सिलसिले में गुजरना पड़ता था।
Question
कस्बे में लड़के और लड़कियों के लिए कुल कितने स्कूल थे?
Answer
कस्बे में लड़कों का एक स्कूल और लड़कियों का एक स्कूल था।
Question
कस्बे में किस चीज का एक छोटा सा कारखाना था?
Answer
कस्बे में सीमेंट का एक छोटा सा कारखाना था।
Question
कस्बे में मनोरंजन के लिए क्या सुविधा उपलब्ध थी?
Answer
कस्बे में दो ओपन एयर सिनेमाघर थे।
Question
नगरपालिका द्वारा नेताजी की प्रतिमा कहाँ लगवाई गई थी?
Answer
प्रतिमा शहर के मुख्य बाजार के मुख्य चौराहे पर लगवाई गई थी।
Question
नेताजी की प्रतिमा किस सामग्री की बनी हुई थी?
Answer
वह प्रतिमा संगमरमर की बनी हुई थी।
Question
नगरपालिका ने प्रतिमा बनाने का काम किसे सौंपा था?
Answer
कस्बे के इकलौते हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर, मोतीलाल जी को।
Question
मोतीलाल जी ने कितने समय में मूर्ति बनाकर 'पटक देने' का विश्वास दिलाया था?
Answer
उन्होंने महीने-भर में मूर्ति बनाने का विश्वास दिलाया था।
Question
प्रतिमा की ऊँचाई कितनी थी?
Answer
टोपी की नोक से कोट के दूसरे बटन तक प्रतिमा की ऊँचाई लगभग दो फुट थी।
Question
मूर्तिकला की शब्दावली में दो फुट ऊँची प्रतिमा को क्या कहते हैं?
Answer
ऐसी प्रतिमा को 'बस्ट' कहा जाता है।
Question
नेताजी की प्रतिमा को देखते ही कौन से नारे याद आने लगते थे?
Answer
'दिल्ली चलो' और 'तुम मुझे खून दो...' जैसे नारे याद आने लगते थे।
Question
प्रतिमा में कौन सी एक मुख्य चीज की कमी थी?
Answer
नेताजी की आँखों पर संगमरमर का चश्मा नहीं था।
Question
हालदार साहब ने प्रतिमा पर पहली बार किस तरह का चश्मा देखा?
Answer
उन्होंने एक सामान्य और सचमुच के चश्मे का चौड़ा काला फ्रेम देखा।
Question
हालदार साहब की कौतुकभरी मुस्कान का क्या कारण था?
Answer
पत्थर की मूर्ति पर वास्तविक चश्मा देखकर वे मुस्कुरा उठे थे।
Question
दूसरी बार गुजरने पर हालदार साहब ने प्रतिमा पर कैसा चश्मा पाया?
Answer
उन्होंने तार के फ्रेम वाला गोल चश्मा लगा हुआ पाया।
Question
हालदार साहब की कस्बे से गुजरते समय क्या आदत पड़ गई थी?
Answer
उनकी आदत चौराहे पर रुकना, पान खाना और मूर्ति को ध्यान से देखना पड़ गई थी।
Question
पानवाला दिखने में कैसा व्यक्ति था?
Answer
वह एक काला, मोटा और खुशमिजाज आदमी था।
Question
पानवाले की हँसी का विशिष्ट लक्षण क्या था?
Answer
हँसते समय उसकी तोंद थिरकती थी और लाल-काली बत्तीसी दिखती थी।
Question
प्रतिमा का चश्मा कौन बदलता था?
Answer
कैप्टन चश्मेवाला प्रतिमा का चश्मा बदलता था।
Question
चश्मेवाला प्रतिमा पर अपना चश्मा क्यों फिट कर देता था?
Answer
उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति आहत करती थी और असुविधाजनक लगती थी।
Question
यदि ग्राहक को मूर्ति पर लगा फ्रेम चाहिए होता, तो कैप्टन क्या करता था?
Answer
वह मूर्ति से फ्रेम उतारकर ग्राहक को दे देता और नेताजी को दूसरा फ्रेम लौटा देता।
Question
पानवाले ने मूर्ति पर चश्मा न होने का क्या कारण बताया?
Answer
उसने बताया कि मूर्तिकार मास्टर चश्मा बनाना भूल गया।
Question
मूर्तिकार द्वारा पत्थर का पारदर्शी चश्मा न बना पाने का संभावित कारण क्या था?
Answer
संभवतः बारीकी के चक्कर में पत्थर का चश्मा टूट गया होगा या वह असफल रहा होगा।
Question
हालदार साहब ने चश्मेवाले के बारे में पानवाले से क्या जिज्ञासा व्यक्त की?
Answer
उन्होंने पूछा कि क्या वह नेताजी का साथी है या आज़ाद हिंद फ़ौज का पूर्व सिपाही।
Question
पानवाले ने चश्मेवाले का मजाक उड़ाते हुए क्या कहा?
Answer
उसने कहा, "वो लंगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!"
Question
चश्मेवाले का वास्तविक स्वरूप क्या था?
Answer
वह एक बेहद बूढ़ा, मरियल-सा लंगड़ा आदमी था जो गांधी टोपी पहनता था।
Question
चश्मेवाला अपनी छोटी-सी संदूकची और बाँस पर चश्मे लेकर कहाँ से निकला था?
Answer
वह अभी-अभी एक गली से निकला था और अपनी फेरी लगाता था।
Question
हालदार साहब को पानवाले की कौन सी बात अच्छी नहीं लगी?
Answer
उन्हें एक देशभक्त का इस तरह मजाक उड़ाया जाना अच्छा नहीं लगा।
Question
हालदार साहब कितने समय तक मूर्ति में बदलते चश्मों को देखते रहे?
Answer
वे दो साल तक अपने काम के सिलसिले में इसे देखते रहे।
Question
एक बार प्रतिमा के चेहरे पर चश्मा क्यों नहीं था?
Answer
उस दिन पान की और चौराहे की अधिकांश दुकानें बंद थीं।
Question
कैप्टन चश्मेवाले की मृत्यु की खबर हालदार साहब को किसने दी?
Answer
यह खबर उदास होकर पानवाले ने अपनी आँखों को धोती से पोंछते हुए दी।
Question
कैप्टन की मृत्यु के बाद हालदार साहब क्यों दुखी हो गए?
Answer
वे उस कौम के भविष्य को सोचकर दुखी थे जो देशभक्तों पर हँसती है।
Question
पंद्रह दिन बाद कस्बे में घुसने से पहले हालदार साहब ने क्या सोचा?
Answer
उन्होंने सोचा कि वे चौराहे पर नहीं रुकेंगे और मूर्ति की तरफ देखेंगे भी नहीं।
Question
हालदार साहब ने ड्राइवर को चौराहे पर न रुकने के लिए क्या बहाना बनाया?
Answer
उन्होंने कहा कि आज बहुत काम है और पान आगे कहीं खा लेंगे।
Question
हालदार साहब ने अचानक जीप रोकने के लिए क्यों चीखा?
Answer
उन्होंने मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा सा चश्मा देखा था।
Question
मूर्ति की आँखों पर सरकंडे का चश्मा किसने लगाया होगा?
Answer
संभवतः वह चश्मा बच्चों ने बनाकर लगाया था।
Question
सरकंडे का चश्मा देखकर हालदार साहब की क्या प्रतिक्रिया थी?
Answer
वे भावुक हो गए और उनकी आँखें भर आईं।
Question
सरकंडे का चश्मा किस बात की उम्मीद जगाता है?
Answer
यह उम्मीद जगाता है कि नई पीढ़ी में भी देशभक्ति की भावना जीवित है।
Question
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार 'साहचर्यगत प्रेम' क्या है?
Answer
जिनके बीच हम रहते हैं, उनके प्रति जो लगाव या राग पैदा होता है, वही साहचर्यगत प्रेम है।
Question
शुक्ल जी के अनुसार, सच्चा देश-प्रेम किससे होना चाहिए?
Answer
सच्चा देश-प्रेम देश के मनुष्यों, पशु-पक्षियों, पेड़ों, नदियों और पहाड़ों सबसे होना चाहिए।