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दीपदान (डॉ० रामकुमार वर्मा) - विस्तृत सारांश

1. लेखक और मुख्य पात्र परिचय

  • लेखक: इस ऐतिहासिक एकांकी के रचयिता डॉ. रामकुमार वर्मा हैं, जिन्हें हिंदी नाटकों का जनक कहा जाता है।
  • कुँवर उदय सिंह: चित्तौड़ के स्वर्गीय महाराणा साँगा के सबसे छोटे पुत्र और राज्य के उत्तराधिकारी (आयु 14 वर्ष)।
  • पन्ना (धाय माँ): कुँवर उदय सिंह की देखभाल करने वाली धाय और संरक्षिका (आयु 30 वर्ष)।
  • चंदन: पन्ना धाय का अपना सगा पुत्र, जो कुँवर का हमउम्र है (आयु 13 वर्ष)।
  • बनवीर: महाराणा साँगा के भाई का दासी-पुत्र, जो अत्यंत क्रूर, विलासी और सत्ता का लालची है।
  • अन्य पात्र: सोना (रावल की रूपवती पुत्री), सामली (महल की दासी) और कीरत (जूठी पत्तल उठाने वाला बारी)।

2. कुँवर उदय सिंह की ज़िद और पन्ना की चिंता

  • एकांकी की शुरुआत कुँवर उदय सिंह के कक्ष से होती है। रात का समय है और महल में तुलजा भवानी के सामने 'दीपदान' और नाच-गाने का उत्सव चल रहा है।
  • कुँवर उदय सिंह भी नाच देखने की ज़िद करते हैं, लेकिन पन्ना धाय उन्हें यह कहकर रोक देती हैं कि वह चित्तौड़ के भविष्य और कुलदीपक हैं, उन्हें यह सब शोभा नहीं देता।
  • पन्ना की बात सुनकर कुँवर उदय सिंह रूठ जाते हैं और बिना भोजन किए अपनी शय्या (बिस्तर) पर जाकर सो जाते हैं।

3. सोना का प्रवेश और बनवीर की कूटनीति

  • नाच-गाने में हिस्सा लेने वाली खूबसूरत लड़की सोना पन्ना धाय के पास आती है और उसे भी उत्सव में चलने को कहती है।
  • पन्ना धाय बहुत समझदार हैं। वह जानती हैं कि यह सारा उत्सव और दीपदान बनवीर की एक चाल है ताकि महल के सभी लोग नाच-गाने में व्यस्त हो जाएँ।
  • पन्ना सोना को फटकार लगाती है और बनवीर के बुरे इरादों से सावधान करती है। सोना वहाँ से चली जाती है।

4. सामली द्वारा भयानक समाचार लाना

  • पन्ना का पुत्र चंदन आता है और बताता है कि सोना रोते हुए गई है। पन्ना उसे थोड़ी देर बाद भोजन कराने का वादा करती है।
  • तभी महल की परिचारिका (दासी) सामली घबराते हुए कमरे में भागती हुई आती है।
  • सामली एक भयानक खबर देती है कि क्रूर बनवीर ने मौका पाकर सोते हुए महाराणा विक्रमादित्य की हत्या कर दी है।
  • वह पन्ना को बताती है कि अब बनवीर कुँवर उदय सिंह को मारने के लिए इधर ही आ रहा है, ताकि राजसिंहासन पर कोई और दावेदार न बचे।

5. कीरत बारी की मदद से उदय सिंह की रक्षा

  • कुँवर के प्राण संकट में देखकर पन्ना धाय उन्हें बचाने की योजना बनाती है। इसी बीच जूठी पत्तल उठाने वाला विश्वासी सेवक 'कीरत बारी' वहाँ आता है।
  • पन्ना कीरत को स्थिति समझाती है। दोनों मिलकर सोए हुए कुँवर उदय सिंह को कीरत की बड़ी टोकरी में लिटा देते हैं।
  • टोकरी के ऊपर जूठी पत्तलें ढक दी जाती हैं ताकि किसी को शक न हो। कीरत बहादुरी से कुँवर को महल से बाहर बेरिस नदी के पास श्मशान तक सुरक्षित पहुँचाने की जिम्मेदारी लेता है।

6. पन्ना धाय का कठोर निर्णय और चंदन को सुलाना

  • उदय सिंह के सुरक्षित बाहर चले जाने के बाद, पन्ना के सामने यह संकट आता है कि बनवीर कुँवर की शय्या खाली देखकर सब समझ जाएगा और उन्हें खोज निकालेगा।
  • अपने स्वामी (महाराणा साँगा) के वंश को बचाने के लिए पन्ना धाय अपने कलेजे पर पत्थर रखकर एक महाबलिदान का फैसला करती है।
  • वह अपने मासूम बेटे चंदन को कुँवर उदय सिंह के कपड़े पहनाती है और उसे कुँवर की ही शय्या पर सुला देती है।
  • वह उसे एक लोरी (गीत) गाकर गहरी नींद में सुला देती है, यह जानते हुए भी कि वह अपने ही हाथों अपने बेटे को मृत्यु की शय्या पर लेटा रही है।

7. बनवीर का आगमन और एकांकी का दुखद परंतु गौरवशाली अंत

  • शराब के नशे में चूर और हाथ में खून से सनी तलवार लिए बनवीर कमरे में प्रवेश करता है।
  • वह पहले पन्ना को लालच देता है कि यदि वह कुँवर को सौंप दे तो उसे एक बड़ी जागीर (संपत्ति) दे दी जाएगी।
  • पन्ना उसे 'हत्यारा' और 'पापी' कहकर धिक्कारती है और अपनी कटार से बनवीर पर हमला करती है, लेकिन कटार उसकी ढाल से टकराकर गिर जाती है।
  • क्रोधित बनवीर कुँवर की शय्या की ओर बढ़ता है और कुँवर उदय सिंह के धोखे में सोए हुए चंदन पर अपनी तलवार चला देता है।
  • चंदन की चीख के साथ ही उसकी मृत्यु हो जाती है और पन्ना धाय चीखकर मूर्छित (बेहोश) होकर गिर पड़ती है।
  • इसी के साथ मेवाड़ के इतिहास में पन्ना धाय के इस अकल्पनीय और सर्वोच्च 'दीपदान' (पुत्रदान) की गौरव गाथा पूरी होती है।
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