6. दीपदान (डॉ० रामकुमार वर्मा) - प्रश्नोत्तर
१. सही या गलत
प्रश्न १: डॉ० रामकुमार वर्मा को हिंदी नाटकों का जनक कहा जाता है।
उत्तर: सत्य
प्रश्न २: कुँवर उदय सिंह की आयु तेरह वर्ष थी।
उत्तर: असत्य (कुँवर उदय सिंह की आयु चौदह वर्ष थी, तेरह वर्ष पन्ना के पुत्र चंदन की आयु थी।)
प्रश्न ३: बनवीर महाराणा साँगा के भाई पृथ्वीराज का दासी-पुत्र था।
उत्तर: सत्य
प्रश्न ४: कीरत बारी ने कुँवर उदय सिंह को अपनी टोकरी में छिपाकर महल से बाहर निकाला।
उत्तर: सत्य
प्रश्न ५: पन्ना धाय ने कुँवर उदय सिंह को बचाने के लिए अपने पुत्र का बलिदान नहीं दिया।
उत्तर: असत्य (पन्ना धाय ने कुँवर की रक्षा के लिए अपने ही पुत्र चंदन का बलिदान दे दिया था।)
२. रिक्त स्थानों की पूर्ति
१. कुँवर उदय सिंह चित्तौड़ के स्वर्गीय महाराणा साँगा के सबसे छोटे पुत्र थे।
२. पन्ना धाय के पुत्र का नाम चंदन था, जो साहस और स्नेह का प्रतीक था।
३. बनवीर ने नगर भर में नाच-गान का त्योहार मनवाया था, जिससे लोगों का ध्यान बँटा रहे।
४. कीरत बारी महल से जूठी पत्तल उठाने का काम करता था।
५. सोना रावल स्वरूप सिंह की लड़की थी, जो अत्यंत रूपवती और नटखट थी।
३. लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न १: पन्ना धाय कौन थीं और उनकी आयु कितनी थी?
उत्तर: पन्ना धाय खींची जाति की राजपूतानी थीं और कुँवर उदय सिंह का संरक्षण करने वाली (देखभाल करने वाली) धाय माँ थीं। उनकी आयु तीस वर्ष थी।
प्रश्न २: कुँवर उदय सिंह क्यों रूठ गए थे?
उत्तर: कुँवर उदय सिंह तुलजा भवानी के सामने हो रहे दीपदान और नाच-गान को देखना चाहते थे, लेकिन पन्ना धाय ने उन्हें वहाँ जाने से रोक दिया। इसी बात पर वे रूठ कर बिना भोजन किए ही सो गए।
प्रश्न ३: सामली ने पन्ना धाय को आकर क्या भयानक समाचार दिया?
उत्तर: अंतःपुर की परिचारिका सामली ने पन्ना धाय को बताया कि क्रूर बनवीर ने सोते हुए महाराणा विक्रमादित्य की हत्या कर दी है और अब वह कुँवर उदय सिंह को भी मारने के लिए आ रहा है।
प्रश्न ४: कीरत बारी ने पन्ना धाय की सहायता कैसे की?
उत्तर: कीरत बारी ने सोए हुए कुँवर उदय सिंह को अपनी जूठी पत्तलों वाली बड़ी टोकरी में छिपा लिया और बिना किसी सिपाही की नज़र में आए, सुरक्षित रूप से महल के बाहर बेरिस नदी के किनारे श्मशान तक पहुँचा दिया।
४. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न १: पन्ना धाय ने कुँवर उदय सिंह की रक्षा किस प्रकार की? विस्तार से बताइए।
उत्तर: पन्ना धाय को जब पता चला कि बनवीर महाराणा विक्रमादित्य की हत्या कर चुका है और कुँवर उदय सिंह के प्राण संकट में हैं, तो उन्होंने तुरंत एक योजना बनाई। उन्होंने विश्वासी सेवक कीरत बारी की जूठी पत्तलों वाली टोकरी में कुँवर उदय सिंह को सुलाकर महल से बाहर सुरक्षित भेज दिया। बनवीर को धोखा देने के लिए, पन्ना ने अपने सगे पुत्र चंदन को उदय सिंह के कपड़े पहनाकर उसकी शय्या पर सुला दिया। जब बनवीर आया, तो उसने चंदन को ही कुँवर समझकर मार डाला। इस प्रकार पन्ना ने अपने पुत्र का महाबलिदान देकर कुँवर उदय सिंह की रक्षा की।
प्रश्न २: बनवीर के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं? 'दीपदान' एकांकी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बनवीर महाराणा साँगा के भाई का दासी-पुत्र था। वह अत्यंत क्रूर, विलासी, कूटनीतिज्ञ और सत्ता का लालची था। राज्य हड़पने के लिए उसने एक गहरी चाल चली और नगर में नाच-गान का आयोजन करवाकर सबका ध्यान भटका दिया। इसी बीच उसने सोते हुए महाराणा विक्रमादित्य की निर्ममता से हत्या कर दी। वह इतना हृदयहीन था कि सिंहासन के लिए उसने एक मासूम बालक (चंदन) पर भी तलवार चलाने में कोई संकोच नहीं किया।
प्रश्न ३: पन्ना धाय के चरित्र की कौन-सी बातें आपको सबसे अधिक प्रभावित करती हैं?
उत्तर: पन्ना धाय एक अत्यंत वीर, साहसी, बुद्धिमती, स्वामीभक्त और दूरदर्शी महिला थीं। उनमें राजपूती शौर्य और त्याग की भावना कूट-कूट कर भरी थी। उन्होंने अपने स्वामी के वंश की रक्षा के लिए अपने कलेजे पर पत्थर रखकर अपने ही सगे पुत्र चंदन का उत्सर्ग (बलिदान) कर दिया। उनका मातृत्व महान था, लेकिन उनकी स्वामीभक्ति और देशभक्ति उससे भी कहीं अधिक महान थी। उनका यही अद्वितीय और निःस्वार्थ बलिदान हमें सबसे अधिक प्रभावित करता है।
प्रश्न ४: 'दीपदान' एकांकी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'दीपदान' एकांकी का शीर्षक अत्यंत सार्थक, आकर्षक और प्रतीकात्मक है। एकांकी में एक ओर तुलजा भवानी के मंदिर में लड़कियों द्वारा दीपों का दान (दीपदान) किया जा रहा है, जो केवल एक उत्सव है। वहीं दूसरी ओर, पन्ना धाय अपने कुल-दीपक (पुत्र चंदन) का रक्त की धारा पर बलिदान देकर मेवाड़ के सच्चे उत्तराधिकारी की रक्षा करती हैं। पन्ना धाय द्वारा किया गया यह सर्वोच्च 'दीपदान' (पुत्रदान) ही इस एकांकी की आत्मा और मुख्य घटना है, अतः यह शीर्षक पूर्णतः उपयुक्त है।