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साना-साना हाथ जोड़ि...
1. गंगटोक का जादुई सौंदर्य और प्रार्थना
- लेखिका (मधु कांकरिया) गंगटोक की रात की सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध हो गईं। उन्हें लगा जैसे आसमान उल्टा हो गया है और तारे बिखरकर नीचे टिमटिमा रहे हैं।
- गंगटोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' कहा जाता है क्योंकि वहाँ के लोगों ने अपनी कड़ी मेहनत से शहर को हर स्थिति में सुंदर बनाए रखा है।
- लेखिका ने एक नेपाली युवती से एक प्रार्थना सीखी: "साना-साना हाथ जोड़ि, गर्दहु प्रार्थना। हाम्ऱो जीवन तिम्ऱो कौसेली" (छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रही हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो)।
2. युमथांग की यात्रा और बौद्ध पताकाएँ
- लेखिका अपने ड्राइवर-कम-गाइड जितेन नार्गे और सहेली मणि के साथ युमथांग के लिए निकलीं।
- रास्ते में उन्होंने सफेद बौद्ध पताकाएँ देखीं। जितेन ने बताया कि जब किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर पवित्र स्थान पर 108 श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं, जिन्हें उतारा नहीं जाता।
- किसी शुभ कार्य की शुरुआत में रंगीन पताकाएँ लगाई जाती हैं।
- रास्ते में 'कवी-लोंग स्टॉक' नामक जगह दिखी, जहाँ 'गाइड' फिल्म की शूटिंग हुई थी।
- लेखिका ने एक कुटिया में घूमता हुआ 'धर्म चक्र' (प्रेयर व्हील) देखा। मान्यता है कि इसे घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। लेखिका को लगा कि विज्ञान की प्रगति के बावजूद पूरे भारत की आत्मा और आस्थाएँ एक जैसी हैं।
3. हिमालय का विराट रूप और प्राकृतिक सौंदर्य
- जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ रही थी, हिमालय विशाल होता जा रहा था। रास्ते संकरे और जलेबी की तरह घुमावदार हो रहे थे।
- 'सेवन सिस्टर्स वॉटर फॉल' पर जीप रुकी। झरने का सौंदर्य और संगीत लेखिका को जीवन की शक्ति का अहसास करा रहा था।
- तीस्ता नदी का सौंदर्य भी अपने चरम पर था, जो सिलीगुड़ी से ही उनके साथ चल रही थी।
4. सौंदर्य के बीच भूख और गरीबी (पत्थर तोड़ती पहाड़िने)
- अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य के बीच लेखिका ने कुछ पहाड़ी औरतों को पत्थर तोड़ते देखा। उनकी कोमल काया पर हाथों में कुदाल और हथौड़े थे।
- कई महिलाओं की पीठ पर बंधी 'डोको' (बड़ी टोकरी) में उनके बच्चे सो रहे थे। यह दृश्य मातृत्व और श्रम-साधना का अनूठा संगम था।
- बी.आर.ओ. के कर्मचारी ने बताया कि ये महिलाएं खतरनाक रास्तों को चौड़ा करने का दुसाध्य कार्य कर रही हैं, जिसमें कई बार जान भी चली जाती है।
- लेखिका को अहसास हुआ कि ये श्रम-सुंदरियाँ समाज से बहुत कम लेकर उसे बहुत अधिक लौटाती हैं।
5. पहाड़ी बच्चों का संघर्ष और चाय के बागान
- लेखिका ने स्कूल से लौटते बच्चों को देखा। जितेन ने बताया कि पहाड़ पर कोई स्कूल बस नहीं होती। बच्चे रोज 3-4 किलोमीटर की पहाड़ी चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाते हैं।
- ये बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ मवेशी चराते हैं, पानी भरते हैं और लकड़ियाँ ढोते हैं।
- सूरज ढलने पर चाय के बागानों में युवतियां सिक्किमी परिधान (बोकु) पहने चाय की पत्तियां तोड़ती नजर आईं।
6. लायुंग और कटाओ (भारत का स्विट्जरलैंड)
- लेखिका ने लायुंग में एक लकड़ी के घर में रात्रि विश्राम किया। वहाँ का वातावरण बेहद शांत था।
- अगले दिन वे 'कटाओ' गए, जिसे भारत का स्विट्जरलैंड कहा जाता है। जितेन ने बताया कि कटाओ अभी तक 'टूरिस्ट स्पॉट' नहीं बना है, इसलिए वहाँ दुकानें नहीं हैं और उसकी प्राकृतिक सुंदरता बरकरार है।
- वहाँ ताजी और सुंदर बर्फ देखकर लेखिका का मन झूम उठा। उन्हें लगा जैसे वे किसी दैवीय लोक में आ गई हों।
- मणि ने हिमालय को 'जल स्तंभ' (Water Pillar) कहा। उसने समझाया कि प्रकृति सर्दियों में बर्फ के रूप में जल संग्रह करती है और गर्मियों में यही बर्फ पिघलकर नदियों के रूप में लोगों की प्यास बुझाती है।
7. सीमा पर तैनात फौजी और वापसी
- कटाओ से आगे चीन की सीमा के पास लेखिका ने फौजियों की छावनियाँ देखीं।
- कड़कड़ाती ठंड (माइनस 15 डिग्री सेल्सियस) में पहरा देते एक फौजी ने कहा, "आप चैन की नींद सो सकें, इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं।" लेखिका का मन फौजियों के प्रति कृतज्ञता और गर्व से भर गया।
- वापसी में युमथांग घाटी में 'प्रियुता' और 'रूडोडेंड्रो' के फूल देखे।
- जितेन ने एक पत्थर दिखाया जिस पर गुरु नानक के पैरों के निशान माने जाते हैं। साथ ही 'खेदुम' नामक स्थान के बारे में बताया जहाँ देवी-देवताओं का निवास माना जाता है और वहाँ गंदगी फैलाना वर्जित है।
- अंत में बताया गया कि सिक्किम के भारत में मिलने के बाद, आर्मी के कप्तान शेखर दत्ता के सुझाव पर रास्तों को पर्यटन के लिए विकसित किया गया।
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