रीढ़ की हड्डी - प्रश्न-अभ्यास
1. रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद बात-बात पर "एक हमारा जमाना था..." कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस प्रकार की तुलना करना कहाँ तक तर्कसंगत है?
यह तुलना पूर्ण रूप से तर्कसंगत नहीं है। हर ज़माने की अपनी परिस्थितियाँ, अपना माहौल और अपनी कमियाँ-खूबियाँ होती हैं। समय परिवर्तनशील है और समय के साथ बदलाव आना स्वाभाविक है।
1. अतीत को याद करना ठीक है, लेकिन हर बात में अतीत को बेहतर और वर्तमान को खराब बताना सही नहीं है।
2. खान-पान और स्वास्थ्य में बदलाव आया है, लेकिन आज शिक्षा और तकनीक में उन्नति भी हुई है।
3. बुजुर्गों द्वारा बार-बार ऐसी तुलना करना नई पीढ़ी में हीन भावना पैदा कर सकता है। इसलिए, वर्तमान को स्वीकार करना ही बुद्धिमानी है।
2. रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?
यह विरोधाभास भारतीय समाज में लड़की के पिता की विवशता और लाचारी को उजागर करता है।
1. रामस्वरूप एक आधुनिक विचारों वाले पिता हैं जो अपनी बेटी को बी.ए. तक पढ़ाते हैं।
2. लेकिन जब शादी की बात आती है, तो समाज (गोपाल प्रसाद जैसे लोगों) की दकियानूसी सोच के आगे उन्हें झुकना पड़ता है।
3. वे जानते हैं कि अगर उन्होंने सच बताया तो उनकी बेटी की शादी नहीं होगी। यह पिता की मजबूरी है कि उसे अपनी बेटी के भविष्य के लिए झूठ का सहारा लेना पड़ता है।
3. अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह उचित क्यों नहीं है?
रामस्वरूप अपनी बेटी उमा से यह अपेक्षा करते हैं कि वह अपनी शिक्षा छिपाए, कम बोले, बनावटी सुंदरता (पाउडर आदि) का उपयोग करे और सीधी-सादी, कम अक्ल वाली लड़की होने का नाटक करे। यह उचित नहीं है क्योंकि:
1. यह धोखे की नींव पर रिश्ता जोड़ने जैसा है।
2. यह उमा के आत्म-सम्मान और व्यक्तित्व का अपमान है।
3. लड़की कोई निर्जीव वस्तु नहीं है जिसे सजा-धजा कर पेश किया जाए। उसे अपने असली रूप में ही स्वीकार किया जाना चाहिए।
4. गोपाल प्रसाद विवाह को 'बिज़नेस' मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखें।
हाँ, मेरे विचार से दोनों ही अपराधी हैं, हालाँकि उनके अपराध का स्वरूप थोड़ा अलग है:
1. गोपाल प्रसाद: वे विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को 'बिज़नेस' (व्यापार) मानते हैं। वे लालची हैं और एक ऐसी बहू चाहते हैं जो उनके इशारों पर चले। उनकी सोच समाज के लिए घातक है।
2. रामस्वरूप: वे गोपाल प्रसाद की गलत माँगों का विरोध करने के बजाय उनका साथ देते हैं। अपनी बेटी की पढ़ाई छिपाकर वे भी झूठ और धोखे का सहारा लेते हैं। बुराई को सहना और उसका साथ देना भी अपराध है। इसलिए, वे भी बराबर के दोषी हैं।
5. "...आपके लाड़ले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं..." उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है?
इस कथन के माध्यम से उमा शंकर की निम्नलिखित कमियों की ओर संकेत करती है:
1. शारीरिक कमी: शंकर झुककर बैठता है, उसकी कमर सीधी नहीं है।
2. चरित्र की कमजोरी: 'रीढ़ की हड्डी' मुहावरे का अर्थ है- 'चरित्र' या 'आत्मबल'। शंकर का अपना कोई व्यक्तित्व नहीं है। वह अपने पिता की हाँ में हाँ मिलाता है।
3. दुश्चरित्रता: वह लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर लगाते हुए पकड़ा गया था और अपमानित होकर भागा था। वह एक कायर और चरित्रहीन युवक है।
6. शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की-समाज को कैसे व्यक्तित्व की ज़रूरत है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
समाज को उमा जैसी निडर और शिक्षित लड़कियों के व्यक्तित्व की ज़रूरत है।
तर्क:
1. उमा शिक्षित है और उसे सही-गलत की समझ है।
2. उसमें अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का साहस है। वह गोपाल प्रसाद जैसे दकियानूसी लोगों को करारा जवाब देती है।
3. दूसरी ओर, शंकर जैसे लड़के रीढ़विहीन होते हैं। वे समाज को आगे नहीं ले जा सकते, बल्कि वे तो पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी सोच के गुलाम हैं। एक स्वस्थ समाज का निर्माण उमा जैसे स्वाभिमानी नागरिक ही कर सकते हैं।
7. 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक एकांकी की मूल भावना को व्यक्त करने में पूर्णतः सार्थक है:
1. प्रतीकात्मक अर्थ: रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा और मज़बूत रखती है। उसी प्रकार, चरित्र मनुष्य के व्यक्तित्व को मज़बूत बनाता है। शंकर में इसी चरित्र रूपी 'रीढ़ की हड्डी' की कमी है।
2. व्यंग्य: गोपाल प्रसाद अपने बेटे के लिए कम पढ़ी-लिखी लड़की ढूँढ रहे हैं ताकि वह दबी रहे, जबकि उनका खुद का बेटा (शंकर) बिना रीढ़ का (कमज़ोर चरित्र वाला) है।
3. उमा अंत में इसी बात पर चोट करती है, जो पूरी कहानी का निचोड़ है।
8. कथावस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों?
कथावस्तु के आधार पर मैं उमा को एकांकी का मुख्य पात्र मानता हूँ/मानती हूँ।
कारण:
1. पूरी कहानी उमा की शादी के इर्द-गिर्द घूमती है।
2. भले ही वह मंच पर थोड़ी देर के लिए आती है, लेकिन वही कहानी को अंजाम तक पहुँचाती है।
3. उमा ही वह पात्र है जो लेखक के विचारों (नारी शिक्षा और सम्मान) का प्रतिनिधित्व करती है और समाज की गलत सोच पर प्रहार करती है। वह असली 'हीरो' है।
9. एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
रामस्वरूप:
1. आधुनिक होकर भी कायर: वे स्त्री शिक्षा के समर्थक हैं लेकिन समाज से डरते हैं।
2. विवश पिता: बेटी की शादी के लिए झूठ बोलने को मजबूर हैं।
गोपाल प्रसाद:
1. दकियानूसी और ढोंगी: खुद पढ़े-लिखे (वकील) हैं, बेटा डॉक्टर बना रहे हैं, लेकिन बहू अनपढ़ चाहिए।
2. लालची और व्यापारी मनोवृत्ति: शादी को 'बिज़नेस' कहते हैं।
3. अहंकारी: उन्हें लगता है कि पुरुष श्रेष्ठ हैं और औरतों को सिर्फ घर का काम करना चाहिए।
10. इस एकांकी का क्या उद्देश्य है? लिखिए।
इस एकांकी के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. समाज में व्याप्त दहेज प्रथा और विवाह के व्यापारिक दृष्टिकोण पर प्रहार करना।
2. स्त्री-शिक्षा का महत्व बताना और लड़कियों को आत्म-सम्मान के साथ जीने की प्रेरणा देना।
3. उन लोगों को बेनकाब करना जो खुद उच्च शिक्षित होकर भी महिलाओं को दबाकर रखना चाहते हैं।
4. समाज को यह संदेश देना कि लड़कियाँ कोई 'भेड़-बकरी' या 'कुर्सी-मेज़' नहीं हैं, उनकी भी भावनाएँ होती हैं।
11. समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं?
समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने के लिए हम निम्नलिखित प्रयास कर सकते हैं:
1. शिक्षा का प्रसार: हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे घर और आस-पास की हर लड़की को उच्च शिक्षा मिले।
2. समानता का व्यवहार: हम घर में लड़के और लड़की के बीच कोई भेदभाव नहीं करेंगे।
3. कुप्रथाओं का विरोध: दहेज, बाल-विवाह और घरेलू हिंसा जैसी बुराइयों का खुलकर विरोध करेंगे।
4. आत्मनिर्भरता: महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
5. सम्मान: हम महिलाओं के विचारों और निर्णयों का सम्मान करेंगे, न कि उन पर अपनी मर्जी थोपेंगे।